अमेरिका में इतिहास! पहले मुस्लिम सीनेटर बने अब्दुल, जीतते ही दिया बड़ा मैसेज
मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रचा, वह अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम सीनेटर बने। जीत के बाद उन्होंने कहा, "टैक्स का पैसा हमारे बच्चों पर खर्च होना चाहिए, दूसरों के बच्चों पर बम गिराने पर नहीं।" उन्होंने कॉरपोरेट और अरबपतियों के प्रभाव पर सवाल उठाए। ट्रंप ने उन्हें 'जिहादी' कहा था, फिर भी जनता ने उन्हें जिताया।

अमेरिका के मिशिगन में इतिहास रच दिया गया है। डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। जीत के बाद उन्होंने जो भाषण दिया, उसने पूरे अमेरिका में बहस छेड़ दी है। जीत के बाद मंच से अब्दुल ने अमेरिका की विदेश नीति और टैक्स के पैसे के इस्तेमाल पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा -"टैक्स भरना और यह जानना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए कि आपका पैसा आप पर और आपके बच्चों पर खर्च हो रहा है, न कि किसी दूसरे के बच्चों पर बम गिराने में।"
अब्दुल का इशारा अमेरिका के ईरान युद्ध और इजरायल को दिए जा रहे अरबों डॉलर के हथियार पैकेज की तरफ था। वह लंबे समय से कहते आए हैं कि अमेरिकी लोगों की मेहनत की कमाई देश के अंदर हेल्थकेयर, शिक्षा और महंगाई कम करने पर खर्च होनी चाहिए, न कि विदेशों में जंग लड़ने पर। अब्दुल ने अपने भाषण में अमेरिकी व्यवस्था पर कॉरपोरेट कंपनियों और अरबपतियों के कब्जे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर देश में आम लोगों के लिए रोजमर्रा का सामान खरीदना भी मुश्किल हो गया है। यह अमेरिका की असफलता है। उन्होंने कहा, "हमें फिर से महान बनने की जरूरत नहीं है। हमें उस चीज को अपनाने की जरूरत है, जिसने हमेशा हमें महान बनाया है।
यानी खुद को बेहतर बनाने की इच्छाशक्ति।"अब्दुल ने कहा कि अमेरिका की महानता अपनी कमियों को नजरअंदाज करने में नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने की हिम्मत दिखाने में है। अब्दुल मिस्र मूल के मुस्लिम अमेरिकी हैं। वह डॉक्टर हैं और पहले मिशिगन के हेल्थ डिपार्टमेंट को लीड कर चुके हैं। उनकी पहचान एक प्रगतिशील नेता के रूप में है। इस चुनाव में उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार निशाना बनाया था। ट्रंप ने उन्हें 'जिहादी' तक कहा था। इसके बावजूद मिशिगन के वोटर्स ने उन पर भरोसा जताया। मिशिगन में बड़ी संख्या में अरब-मुस्लिम वोटर हैं, लेकिन अब्दुल को सिर्फ मुस्लिम वोट ही नहीं, बल्कि युवाओं और वर्किंग क्लास का भी भरपूर समर्थन मिला।
अमेरिकी सीनेट के 200 साल से ज्यादा के इतिहास में कभी कोई मुस्लिम सीनेटर नहीं बना था। अब्दुल की जीत ने वो दीवार तोड़ दी है। उनकी जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के भविष्य की दिशा के तौर पर भी देखा जा रहा है, जहां विदेशी युद्धों पर पैसा खर्च करने के बजाय देश के अंदर के मुद्दों पर ध्यान देने की मांग तेज हो रही है।
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