BJP के पूर्व राज्यसभा सांसद और SIS ग्रुप के चेयरमैन आरके सिन्हा नहीं रहे, अंतिम दर्शन के लिए अन्नपूर्णा भवन में रखा जाएगा पार्थिव शरीर
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार सुबह नोएडा स्थित आवास पर 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे, 2025 में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया था। बक्सर में जन्मे सिन्हा जनसंघ से जुड़े और बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे। उन्होंने 1974 में 250 रुपये से SIS ग्रुप की शुरुआत कर उसे अरब डॉलर की कंपनी बनाया। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पटना लाया जाएगा।

नोएडा/पटना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और देश के बड़े उद्योगपतियों में शुमार डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का निधन हो गया है। उन्होंने शुक्रवार 30 अक्टूबर की सुबह नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे 75 वर्ष के थे।परिवार के मुताबिक आरके सिन्हा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। जनवरी 2025 में एक बैठक से लौटते वक्त उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया था, जिसके बाद वे लंबे समय तक कोमा में भी रहे। शुक्रवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने से उनका निधन हो गया। आरके सिन्हा के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली से पटना लाया जाएगा। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में उनका पार्थिव शरीर रखा जाएगा, जहां पार्टी कार्यकर्ता, नेता और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
अंतिम संस्कार पटना में ही किया जाएगा, हालांकि समय की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। आरके सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर जिले के बहियारा गांव में हुआ था। 1966 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उन्हें जनसंघ से जोड़ा। वे जनसंघ के दौर से ही सक्रिय रहे और 1980 में बीजेपी के गठन के समय संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का करीबी माना जाता था। बिहार बीजेपी की राजनीति में उनका विशिष्ट स्थान था। पार्टी ने उन्हें 2014 में बिहार से राज्यसभा भेजा और वे 2020 तक उच्च सदन के सदस्य रहे। राज्यसभा में उन्होंने बिहार के विकास और सुरक्षा उद्योग से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
राजनीति के साथ-साथ आरके सिन्हा ने कारोबार में भी बड़ी पहचान बनाई। उन्होंने पत्रकारिता से करियर शुरू किया था और समाचार एजेंसी हिंदुस्तान समाचार के संस्थापक भी रहे। 1974 में उन्होंने पटना में महज 250 रुपये से सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) इंडिया लिमिटेड की शुरुआत की थी। आज SIS ग्रुप भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी सुरक्षा कंपनी है और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में इसका बड़ा नेटवर्क है, ऑस्ट्रेलिया तक इसका विस्तार है। SIS ग्रुप के वे चेयरमैन थे और कंपनी में लाखों लोगों को रोजगार दिया। उन्हें पटना का सबसे अमीर व्यक्ति भी कहा जाता था और उनकी नेटवर्थ करीब 1 बिलियन डॉलर आंकी जाती है। उनके निधन पर जेडीयू, बीजेपी समेत बिहार के सभी दलों ने शोक जताया है। SIS ग्रुप की ओर से जारी शोक संदेश में उन्हें परिवार और समूह का अभिभावक बताया गया है। कार्यकर्ताओं के बीच वे प्यार से 'बड़े साहब' कहे जाते थे।




