SC से झटके के बाद अनंत सिंह का पहला बयान, 'कोर्ट जहां बोलेगा वहीं जाऊंगा, फिर बेल मिलेगी, डरते नहीं...'
सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह ने कहा- 'हां, सरेंडर कर देंगे'। उन्होंने कहा- कोर्ट ने बुलाया है, तो जहां कहेगा सरेंडर कर दूंगा, मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द कर 1 दिसंबर तक सरेंडर का आदेश दिया है। अनंत सिंह ने बेटी की शादी का हवाला दिया था, पर कोर्ट ने राहत नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने ही हत्या कराई और बेल रद्द करवाई।

पटना। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिलने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह का पहला रिएक्शन सामने आया है। शीर्ष अदालत द्वारा जमानत रद्द कर 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिए जाने के बाद अनंत सिंह ने कहा- 'हां, मैं सरेंडर कर दूंगा। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है।' अनंत सिंह ने कहा कि कोर्ट जब और जहां कहेगा, मैं सरेंडर कर दूंगा। मैं किसी के पास नहीं जाऊंगा, सीधे कोर्ट जाऊंगा। कोर्ट ने मुझे बुलाया है, मैं जाऊंगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय पर पूरा भरोसा है, कोर्ट हमको फिर बेल देगा।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीवी वराले की बेंच ने शुक्रवार को अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और अनंत सिंह के लंबे आपराधिक इतिहास पर विचार किए बिना जमानत देकर गलती की है। हत्या को सिर्फ राजनीतिक विवाद कहना गलत है। बेंच ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है और बिहार पुलिस को 4 महीने के अंदर जांच पूरी करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट से कहा कि परिवार में 25 नवंबर को बेटी की शादी है, इसलिए कुछ मोहलत दी जाए। इस पर कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का अंतिम समय दिया। कोर्ट ने उनकी तत्काल राहत की मांग को खारिज कर दिया।
यह मामला दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है, जो 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोकामा में हुआ था। आरोप है कि चुनावी रंजिश में दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ जनवरी 2026 में चार्जशीट दाखिल हुई थी। पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को 15 हजार रुपये के मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी थी। इस जमानत को दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया। सरेंडर की बात कहते हुए अनंत सिंह ने पलटवार भी किया। उन्होंने कहा कि नीरज कुमार ने ही दुलारचंद यादव की हत्या करा दी है।
जब मेरी बेल हो गई तो नीरज दिल्ली चला गया और मेरा नाम कोर्ट में भेज दिया। सरकार ने मेरे खिलाफ कुछ नहीं किया, नीरज ने मामला पहुंचाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, वो नीरज के कहने पर दिया है। नीतीश कुमार अगर लायक रहते तो मेरे साथ ये सब नहीं होता। पार्टी ने मुझे निकाल दिया है। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि अनंत सिंह पर लगे आरोप सही हैं और उनके खिलाफ 62 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। वहीं इस फैसले पर जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि अनंत सिंह उन पर और उनके परिवार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। अगर मेरी साजिश है तो साबित करके दिखाएं। भगवान सबको देख रहे हैं, न्यायिक संस्थाएं अभी जिंदा हैं।
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