BJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और ब्राह्मण चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले संजयन त्रिपाठी ने भाजपा का दामन छोड़कर समाजवादी पार्टी का झंडा थाम लिया है। रविवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने सपा की सदस्यता ली। इस दौरान उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि 'बीजेपी में घुटन हो रही थी, इसलिए पार्टी छोड़नी पड़ी।' संजयन त्रिपाठी पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा में थे। दो दिन पहले ही उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह अपने घर और गाड़ी से बीजेपी का झंडा उतारते हुए नजर आए थे। उस वीडियो के बाद ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं। आज उन कयासों पर मुहर लग गई। सपा में शामिल होते ही उन्होंने बीजेपी पर जमकर हमला बोला।
संजयन त्रिपाठी ने कहा, "मैंने 15 साल तक बीजेपी के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया, लेकिन पिछले दो सालों से पार्टी में कार्यकर्ताओं की सुनी नहीं जा रही है। सिर्फ कुछ लोगों की चल रही है। ब्राह्मण समाज का लगातार अपमान हो रहा है। मेरी बात को शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंचने दिया जा रहा था। इसलिए घुटन महसूस हो रही थी।" समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संजयन त्रिपाठी का पार्टी में स्वागत किया। अखिलेश ने कहा कि संजयन त्रिपाठी जैसे जमीनी नेता के आने से पार्टी को पूर्वांचल में और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी में आज कोई भी सम्मानित व्यक्ति नहीं रह सकता। जो लोग सच बोलते हैं, उन्हें किनारे कर दिया जाता है।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी अब सिर्फ नफरत की राजनीति करती है। वहां कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है। संजयन त्रिपाठी ने सही समय पर सही फैसला लिया है। उनके आने से पीडीए की ताकत और बढ़ेगी। संजयन त्रिपाठी पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण नेता माने जाते हैं। वह गोरखपुर और देवरिया क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं। वह बीजेपी में 2010 से सक्रिय थे और पार्टी के कई अहम पदों पर रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह टिकट के दावेदार थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था। तब से ही वह पार्टी से नाराज चल रहे थे। माना जा रहा है कि सपा उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
वहीं इस पूरे मामले पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि संजयन त्रिपाठी को पार्टी ने बहुत कुछ दिया, लेकिन वह व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों के जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता। बीजेपी कार्यकर्ताओं की पार्टी है, नेताओं की नहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संजयन त्रिपाठी के सपा में जाने से पूर्वांचल में ब्राह्मण वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। समाजवादी पार्टी लगातार ब्राह्मण चेहरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है और यह उसी रणनीति का हिस्सा है।
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