गठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तकरार तेज हो गई है। इसी बीच सपा के एक वरिष्ठ सांसद ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी पारा चढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी के सांसद एसपी सिंह पटेल ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि राहुल गांधी रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने से डर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव नहीं समझाते तो राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव ही नहीं लड़ते। एसपी सिंह पटेल के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट को लेकर कांग्रेस में भारी असमंजस था।
राहुल गांधी अमेठी से हार के बाद रायबरेली जाने से हिचक रहे थे। तब अखिलेश यादव ने खुद सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से फोन पर बात की और समझाया कि अगर गांधी परिवार का कोई सदस्य यूपी से चुनाव नहीं लड़ेगा तो इसका सीधा नुकसान INDIA गठबंधन को होगा। सपा सांसद ने यहां तक दावा किया कि अखिलेश ने साफ कह दिया था कि अगर राहुल गांधी नहीं लड़ेंगे तो समाजवादी पार्टी रायबरेली में अपना उम्मीदवार उतार देगी। इसके बाद ही राहुल गांधी ने आखिरी दिन नामांकन किया। यही नहीं, पटेल ने कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी हैसियत के हिसाब से सीटें मांगनी चाहिए।
दरअसल, कांग्रेस यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि वह गठबंधन में 50 फीसदी सीटों की हकदार है और लोकसभा में उसके प्रदर्शन को देखते हुए उसे सम्मानजनक सीटें मिलनी चाहिए। इस पर सपा सांसद ने कहा, "150 सीट तो दूर की बात है, कांग्रेस को देखना चाहिए कि उसके कितने सांसद हैं, कितने विधायक हैं, जमीन पर कितने कार्यकर्ता सक्रिय हैं और संगठन किन जिलों में मजबूत है।"पटेल ने गठबंधन के पुराने अनुभव का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में कांग्रेस की वजह से सपा के वोट कटे थे। अगर ऐसा नहीं होता तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बन सकती थी।
इसलिए इस बार कांग्रेस को पिछले चुनाव से सबक लेना चाहिए और बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने गठबंधन के भीतर सेकंड लाइन के नेताओं के बयानों पर भी नाराजगी जताई। कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता बिना सोचे-समझे बयान देते हैं, जिससे गठबंधन को नुकसान पहुंचता है। गठबंधन धर्म का पालन दोनों तरफ से होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अखिलेश यादव ने खुद रायबरेली में कहा था कि सीट बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर होगा - 'जो जीते, वह सीट ले ले'। इसके जवाब में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार करते हुए कहा था कि कांग्रेस किसी के सहारे नहीं है और राहुल गांधी के बिना गठबंधन कुछ नहीं है। किसी को गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए।
अब एसपी सिंह पटेल के इस बयान के बाद सपा-कांग्रेस के बीच खींचतान और बढ़ गई है। एक तरफ कांग्रेस 150 सीटों पर अड़ी है, तो दूसरी तरफ सपा उसे उसकी वर्तमान ताकत दिखा रही है। यूपी में कांग्रेस के पास सिर्फ 2 लोकसभा सांसद और विधानसभा में 2 विधायक हैं, जबकि सपा के 37 लोकसभा सांसद और 111 विधायक हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान सिर्फ सीट शेयरिंग का दबाव बनाने के लिए है। अक्टूबर में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर औपचारिक बातचीत होनी है। उससे पहले इस तरह के बयान देकर सपा कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना रही है ताकि वह ज्यादा सीटें न मांग सके। अब देखना होगा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव इस बयानबाजी को कैसे संभालते हैं।
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