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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 1:31 · नई दिल्ली संस्करण

भारत की बुलेट ट्रेन: 320 किमी/घंटे की रफ्तार पर भी बिना झटके के ट्रैक बदलेगी ट्रेन, अपनाई गई ये तकनीक

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भारत की बुलेट ट्रेन: 320 किमी/घंटे की रफ्तार पर भी बिना झटके के ट्रैक बदलेगी ट्रेन, अपनाई गई ये तकनीक

भारत की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना में महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है, जहां ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी बिना किसी तेज झटके के ट्रैक बदलने में सक्षम होंगी। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चुनौती से निपटने के लिए आधुनिक कैंटेड टर्नआउट तकनीक का उपयोग हो रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों को झटके और कंपन से बचाना है। सामान्य रेलवे ट्रैक पर इतनी तेज गति से पटरी से दूसरी पटरी पर जाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि ट्रैक की दिशा बदलने पर पहियों और रेल पर अचानक पड़ने वाली ताकत में बदलाव होता है, जिससे तेज झटके महसूस होते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए हाई-स्पीड कॉरिडोर में ‘कैंटेड टर्नआउट’ प्रणाली अपनाई जा रही है।

टर्नआउट रेलवे का वह हिस्सा होता है जिसके जरिए ट्रेनें एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाती हैं। कैंटेड टर्नआउट में घुमावदार ट्रैक पर बाहरी रेल को अंदरूनी रेल से थोड़ा ऊंचा रखा जाता है, जिसे ‘कैंट’ या ‘बैंकिंग’ कहते हैं। यह झुकाव मोड़ पर ट्रेन पर लगने वाली केंद्रीय और अपकेंद्री ताकतों को संतुलित करता है। यह तकनीक टर्नआउट वाले हिस्से में भी इस झुकाव को बनाए रखती है, जिससे ट्रेन अचानक किसी अलग ज्यामिति में प्रवेश नहीं करती। इसके अतिरिक्त, ‘मूवेबल क्रॉसिंग’ का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

सामान्य क्रॉसिंग में जहां दो रेल आपस में मिलती हैं, वहां एक गैप होता है जो तेज गति पर कंपन का कारण बनता है। मूवेबल क्रॉसिंग इस गैप को खत्म करती है, जिससे पहियों का गुजरना सुचारु होता है। इस पूरी प्रक्रिया में पॉइंट मशीन की भूमिका अहम होती है, जो टर्नआउट के हिस्सों को सही स्थिति में ले जाकर मजबूती से लॉक करती है। यह उन्नत प्रणाली न केवल यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक आरामदायक बनाएगी, बल्कि ट्रैक बदलते समय लगने वाली अचानक की ताकतों और कंपन में कमी आने से पहियों तथा रेल पर पड़ने वाला दबाव और घिसावट भी कम होगी। इससे लंबे समय में रखरखाव की लागत और जरूरतों को घटाने में मदद मिलेगी।

320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर चलने वाली ट्रेनों के लिए ट्रैक, स्विचिंग सिस्टम और सिग्नलिंग में सटीकता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर कुल 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें महाराष्ट्र और गुजरात के हिस्से शामिल हैं। इस परियोजना में पुल, वायाडक्ट, स्टेशन और आठ पहाड़ी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। लक्ष्य है कि परियोजना का पहला खंड, सूरत से वापी के बीच करीब 100 किलोमीटर का हिस्सा, दिसंबर 2026 तक पूरा हो जाए और इस पर 15 अगस्त 2027 तक ट्रेन संचालन शुरू हो सके। पूरी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल लाइन दिसंबर 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है।

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