भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि: दक्षिण रेलवे में अब बिना रुके दौड़ेंगी ट्रेनें, जानें इसके बड़े फायदे
भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है।

भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। दक्षिण रेलवे ने अपने कुल 5,068 रूट किलोमीटर लंबे ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही लगभग 95 साल पुराना सफर पूरा हो गया है और ट्रेनों के संचालन में इंजन बदलने की झंझट हमेशा के लिए खत्म हो गई है।
दक्षिण रेलवे के इस विशाल नेटवर्क के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का रास्ता अंतिम बचे 71 किलोमीटर लंबे पट्टुकुट्टाई-कराईकुडी (Pattukkottai-Karaikkudi) खंड पर काम पूरा होने के बाद साफ हुआ। इस नवनिर्मित विद्युतीकृत खंड का वैधानिक निरीक्षण पूरा होने के साथ ही जोन का पूरा ब्रॉड-गेज नेटवर्क बिजली से लैस हो गया।
गौरलतब है कि दक्षिण भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की शुरुआत लगभग 95 साल पहले 11 मई 1931 को हुई थी, जब बॉम्बे (मुंबई) के बाद मद्रास (अब चेन्नई) देश का दूसरा ऐसा महानगर बना था जहां इलेक्ट्रिक ट्रेनें चली थीं। इसके बाद 1968 में मद्रास बीच और तांबरम के बीच 25 केवी एसी विद्युतीकरण किया गया। अब लगभग 95 वर्षों की लंबी यात्रा के बाद इस पूरे क्षेत्र ने शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का गौरव हासिल किया है।
इंजन बदलने की झंझट खत्म: अब तक कई रूटों पर डीजल इंजन से इलेक्ट्रिक इंजन या इसके उलट बदलाव करने के लिए ट्रेनों को रोकना पड़ता था। नेटवर्क के 100% विद्युतीकृत होने से ट्रेनें बिना किसी रुकावट के लगातार इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चल सकेंगी। समय की बचत और तेज रफ्तार: बार-बार इंजन न बदलने से ट्रेनों की आवाजाही में तेजी आएगी और गंतव्य तक पहुंचने का समय कम होगा। बेहतर परिचालन दक्षता: पूरे ब्रॉड-गेज पर एक जैसी प्रणाली होने से रेलवे अधिकारियों को रैक और इंजनों के प्रबंधन में बड़ी फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जिससे ट्रेन सेवाएं अधिक भरोसेमंद बनेंगी।
पर्यावरण के अनुकूल और ईंधन की बचत: फॉसिल फ्यूल (डीजल) पर निर्भरता कम होने से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन घटने से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। दक्षिण रेलवे की यह सफलता भारतीय रेलवे के उस बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत देश के सभी ब्रॉड-गेज मार्गों को पर्यावरण-अनुकूल और अधिक उन्नत इलेक्ट्रिक नेटवर्क में बदला जा रहा है।





