PM मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर रेलवे ने दिया बड़ी सौगात, करोड़ो की लागत वाला ये रेल पुल अक्टूबर से होगा शुरू

बिहार की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती देने वाली मोकामा डबल लाइन रेल ब्रिज परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गंगा नदी पर पुराने राजेंद्र सेतु के समानांतर बनाए गए नए रेल पुल को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे की तैयारियों को देखते हुए अक्टूबर 2026 से इस नए पुल पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने की संभावना है। मोकामा में गंगा पर बना यह नया रेल पुल पुराने राजेंद्र सेतु के समानांतर तैयार किया गया है। वर्तमान में पुराने पुल से सिंगल रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन होता है। ट्रेनों की बढ़ती संख्या और रेल यातायात के दबाव को देखते हुए लंबे समय से डबल लाइन की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए पुल के चालू होने के बाद इस रेलखंड की क्षमता बढ़ने और ट्रेनों के संचालन में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
नए रेल पुल को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए रेलवे 20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक मेगा ब्लॉक लेकर नॉन-इंटरलॉकिंग का काम करेगा। इस दौरान नए डबल लाइन रेल पुल, सिग्नलिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक पैनल को आपस में जोड़ने सहित कई तकनीकी कार्य किए जाएंगे। निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए कई ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी बदलाव किया गया है। कुछ ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं, जबकि कुछ के परिचालन पर भी असर पड़ेगा। यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित ट्रेन के मार्ग और समय की जानकारी रेलवे से जांच लेने की सलाह दी गई है।
नए रेल पुल के चालू होने से मोकामा-बरौनी रेलखंड के साथ हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेलमार्ग की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इससे पूर्वी और उत्तरी बिहार के बीच रेल संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। नया रेल कनेक्शन अपर हथीदह, ताल जंक्शन, रामपुर दुमरा, दिनकर ग्राम सिमरिया और बरौनी जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से जुड़ेगा। इससे इस क्षेत्र में रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मोकामा डबल लाइन रेल ब्रिज परियोजना पर करीब 1700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मुख्य रेल पुल की लंबाई लगभग 1.86 किलोमीटर है। कनेक्टिंग ट्रैक और अन्य निर्माण कार्यों को शामिल करने पर पूरी परियोजना की लंबाई करीब 14 किलोमीटर बताई गई है। परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी पर नया रेल पुल बनाने के साथ इस पूरे रेलखंड की क्षमता बढ़ाना है। डबल लाइन शुरू होने के बाद पुराने सिंगल लाइन पुल पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। इससे ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने और आउटर पर लंबे समय तक खड़े रहने की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।
मेगा ब्लॉक के दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के कारण कई प्रमुख ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है। इनमें दिल्ली-कामाख्या एक्सप्रेस, हावड़ा-प्रयागराज रामबाग विभूति एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृतसर-हावड़ा मेल समेत कई ट्रेनें शामिल हैं। रेलवे की ओर से यात्रियों को परिचालन में होने वाले बदलाव की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर सकें।
नए पुल के चालू होने के बाद पटना, बेगूसराय, लखीसराय, समस्तीपुर, खगड़िया और सीमांचल क्षेत्र समेत उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। व्यस्त हावड़ा-दिल्ली रेल मार्ग पर अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों के संचालन की क्षमता भी बढ़ सकती है। फिलहाल रेलवे का फोकस नॉन-इंटरलॉकिंग, सिग्नलिंग और कनेक्टिविटी से जुड़े तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने पर है। सभी काम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे होने पर अक्टूबर 2026 में मोकामा के नए डबल लाइन रेल पुल से ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ हो सकता है।





