पहली बरसी पर इंसाफ: दुलारचंद हत्याकांड में अनंत सिंह की जमानत रद्द, SC बोला - 1 दिसंबर तक करो सरेंडर
दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस सुंदेश और वराले की बेंच ने पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द कर 1 दिसंबर तक सरेंडर करने को कहा है। याचिका दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने दायर की थी। दुलारचंद की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी।

नई दिल्ली / पटना - मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द कर दी है और 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस पी.वी. वराले की बेंच ने यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि पटना हाईकोर्ट का जमानत देने का फैसला गलत था, क्योंकि हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर ध्यान नहीं दिया था।
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब बिहार विधानसभा चुनाव का प्रचार चल रहा था। दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए मोकामा के घोसवारी थाना क्षेत्र के बसावनचक गांव में प्रचार कर रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह का नाम सामने आया था। उन्हें 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेजा गया था। बाद में 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी और 23 मार्च को वह जेल से बाहर आ गए थे।
हाईकोर्ट की इस जमानत को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट से कहा कि उनके परिवार में 25 नवंबर को बेटी की शादी है, इसलिए तुरंत सरेंडर न कराया जाए। इस दलील पर कोर्ट ने मानवीय आधार पर विचार करते हुए उन्हें 1 दिसंबर तक का समय दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिये से देखना सही नहीं है। मामले की जांच अभी जारी है और गवाहों का परीक्षण होना बाकी है।
बिहार सरकार ने 24 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर किया था, जिसमें बताया गया कि अनंत सिंह पर 62 मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए बिहार पुलिस को 4 महीने के भीतर जांच पूरी करने का भी निर्देश दिया है। गौरतलब है कि आज ही 30 अक्टूबर को दुलारचंद यादव की हत्या की पहली बरसी भी है, और संयोग से उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी। हाल ही में जेडीयू ने अनंत सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था।
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