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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:37 · नई दिल्ली संस्करण

Bihar BJP: "बिहार भाजपा के हाथ फिर निराशा, बांकीपुर इफेक्ट ने बदली समीकरण की भाषा!"

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
Bihar BJP: "बिहार भाजपा के हाथ फिर निराशा, बांकीपुर इफेक्ट ने बदली समीकरण की भाषा!"

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बीजेपी की राष्ट्रीय टीम की घोषणा। बिहार बीजेपी के अहम नेता इस बार भी महामंत्री पद की रेस से बाहर रहे। बीजेपी की राष्ट्रीय टीम पर बांकीपुर चुनाव इफेक्ट का पूरा प्रभाव पड़ा है। बिहार से इस बार सांसदों की संख्या काफी है। खासतौर पर इन्हीं सवर्ण वोटरों की जाति को टारगेट किया गया है।

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बीजेपी की राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर भले इसे संतुलित टीम बताया हों लेकिन बिहार बीजेपी के अहम नेता इस बार भी महामंत्री पद की रेस से बाहर रहे। उम्मीद की जा रही थी कि बिहार से इस बार सांसदों की संख्या काफी है। इस बार बिहार का विशेष ख्याल रखा जाएगा, लेकिन इस बार भी बिहार को महामंत्री पद नहीं मिला। चर्चा यह है कि बीजेपी की राष्ट्रीय टीम पर बांकीपुर चुनाव इफेक्ट का पूरा प्रभाव पड़ा है। जनसुराज के रथ पर बिहारी ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत का चढ़ जाना काफी महंगा पड़ा और इस बार राष्ट्रीय संगठन से बाहर रहना पड़ा। माना जा रहा है कि कोर वोटरों की नाराजगी से बीजेपी ही नाराज हो गई। इसलिए खासतौर पर इन्हीं सवर्ण वोटरों की जाति को टारगेट किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी में विरोध जल्द उभर कर सामने नहीं आता है। पर इस बार उम्मीद किए बिहार के कद्दावर नेताओं के चेहरे पर मायूसी नजर आ रही है। अक्सर बीजेपी के केंद्रीय संगठन में बिहार से तीन से चार नेताओं को जगह दी जाती थी। प्रदेश मंत्री के तौर पर नेताओं को बीजेपी की केंद्रीय टीम में जगह तो मिल जाती है लेकिन लंबे अरसे से महामंत्री का पद बिहार के खाते में नहीं आया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद महामंत्री रह चुके हैं। वे नितिन गडकरी की टीम में महामंत्री थे। उसके बाद से अब तक किसी नेता को बिहार से महामंत्री का पद नहीं मिला है।

बीजेपी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले दिवंगत कैलाशपति मिश्र वर्ष 1995 से 2003 तक बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। बीजेपी के केंद्रीय संगठन में दिवंगत सुशील मोदी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रहे। इनके अलावा राधा मोहन सिंह भी उपाध्यक्ष रह चुके हैं। राष्ट्रीय मंत्री केवल रूप में रजनीश कुमार ही राष्ट्रीय संगठन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। राष्ट्रीय मंत्री के रूप में ऋतुराज सिन्हा को राष्ट्रीय टीम में जगह मिली थी। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी रेणु देवी ने भी निभाई थी। बिहार के इन नेताओं ने अपने कार्यों से बेहतरी से अंजाम भी दिया था।

नितिन नबीन की नई टीम में यूं तो बिहार के केवल तीन नेताओं को ही शामिल किया गया है। वैश्य नेता सिद्धार्थ शंभू को राष्ट्रीय मंत्री पद दिया गया। इस बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महामंत्री का पद बिहार के किसी भी बीजेपी नेता को नहीं मिला। ऋतुराज जो कभी राष्ट्रीय मंत्री थे, उन्हें प्रकोष्ठ संकुल का सह संयोजक बनाया गया। शिवेश राम को एससी मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। ये सारे पद काफी अप्रभावशाली करार दिए जा रहे हैं।

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