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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · दोपहर 12:48 · नई दिल्ली संस्करण

DMRC का नया सिस्टम: ट्रेन आने से पहले पता चलेगा किस कोच में कितनी भीड़

दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर DMRC ने रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी डिस्प्ले शुरू किया है। अब प्लेटफॉर्म की PIDS स्क्रीन पर ट्रेन आने से पहले ही C1 से C6 कोच में भीड़ का प्रतिशत दिखेगा। यह सिस्टम कोच में लगे लोड सेंसर से वजन मापकर भीड़ का अंदाजा लगाता है। मैजेंटा लाइन के बाद अब पिंक लाइन पर लागू हुई इस तकनीक से यात्री खाली कोच चुनकर आराम से सफर कर सकेंगे।

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DMRC का नया सिस्टम: ट्रेन आने से पहले पता चलेगा किस कोच में कितनी भीड़

दिल्ली मेट्रो में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने पिंक लाइन पर रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी डिस्प्ले सिस्टम शुरू कर दिया है। अब यात्रियों को ट्रेन आने से पहले ही प्लेटफॉर्म पर लगी स्क्रीन पर पता चल जाएगा कि किस डिब्बे में कितनी भीड़ है और कहां जगह खाली है। यह सुविधा DMRC ने 30 अक्टूबर 2026 से पिंक लाइन पर शुरू की है। इससे पहले यह तकनीक मैजेंटा लाइन (लाइन 8) पर 2022 से चल रही थी, जहां इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। इसी सफलता के बाद अब इसे पिंक लाइन (लाइन 7) पर भी लागू किया गया है, जो मजलिस पार्क से शिव विहार और मौजपुर-बाबरपुर तक जाती है और दिल्ली की सबसे लंबी सर्कुलर लाइन है। 



इस सिस्टम की तकनीक काफी एडवांस है। मेट्रो के हर कोच में वजन मापने वाले लोड सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर कोच का मौजूदा वजन नापते हैं और उसकी तुलना खाली कोच के वजन से करते हैं। इस अंतर के आधार पर अंदाजा लगाया जाता है कि कोच में कितने यात्री हैं और उसकी ऑक्यूपेंसी कितने प्रतिशत है। इसी जानकारी को ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने से कुछ सेकंड पहले प्लेटफॉर्म पर लगी पैसेंजर इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम (PIDS) स्क्रीन पर दिखाया जाता है। ट्रेन के सभी 6 कोचों को C1, C2, C3, C4, C5 और C6 के नाम से दिखाया जाता है, ताकि यात्री आसानी से समझ सकें कि उन्हें प्लेटफॉर्म पर किस जगह खड़ा होना है।



DMRC के प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनuj दयाल के अनुसार, इस डेटा को प्रोसेस करके अनुमानित भीड़ का प्रतिशत निकाला जाता है और सीधे प्लेटफॉर्म स्क्रीन पर भेजा जाता है। सुबह और शाम के पीक आवर्स में पिंक लाइन पर भारी भीड़ होती है। अक्सर देखा जाता है कि ट्रेन के कुछ कोच ज्यादा भरे होते हैं जबकि कुछ में जगह होती है। इस नई सुविधा से यात्री पहले ही कम भीड़ वाले कोच की तरफ बढ़ सकते हैं। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, यात्रियों को भरे हुए डिब्बे में जबरदस्ती घुसने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरा, ट्रेन के अंदर एक तरफ से दूसरी तरफ जाने की भागदौड़ खत्म होगी। पूरे ट्रेन में यात्रियों का बंटवारा बराबर होगा, जिससे सफर ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित होगा।   



DMRC का मानना है कि यह सिस्टम वजन के संतुलन को भी बेहतर बनाएगा, जिससे ट्रेन का संचालन ज्यादा स्मूद होगा। DMRC ने बताया कि पिंक लाइन पर इस सिस्टम को लागू करना मैजेंटा लाइन के मुकाबले ज्यादा मुश्किल था। क्योंकि पिंक लाइन एक सर्कुलर कॉरिडोर है, इसलिए डेटा इंटरलिंकिंग और ट्रेनों की लोकेशन को ट्रैक करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था। फिर भी सफल ट्रायल के बाद अब इसे सभी स्टेशनों पर शुरू कर दिया गया है। यह कदम DMRC के टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सफर को बेहतर बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। आने वाले समय में इस सुविधा को अन्य व्यस्त लाइनों पर भी शुरू करने की योजना है, ताकि दिल्ली मेट्रो का सफर और भी सुविधाजनक बन सके।

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