मोदी सरकार बुलाएगी संसद का विशेष सत्र, इन 2 बिल पर होगा बड़ा फैसला
केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा परिसीमन और महिला आरक्षण बिल होगा। सरकार 2026 जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया और 33% महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू करने का रोडमैप पेश कर सकती है। दक्षिण के राज्यों की सीटों को लेकर भी चर्चा होगी। यह सत्र नवंबर के अंत में 5-7 दिन के लिए बुलाया जा सकता है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस विशेष सत्र में दो सबसे बड़े और अहम मुद्दों - परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। इस सत्र को लेकर संसदीय कार्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों से रिपोर्ट भी मांगनी शुरू कर दी है।दरअसल, 2026 में होने वाली जनगणना के बाद देश में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होनी है। परिसीमन का सीधा असर लोकसभा और विधानसभा सीटों पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि परिसीमन के बाद दक्षिण के राज्यों की तुलना में उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या काफी बढ़ सकती है।
इसे लेकर दक्षिण के कई दलों ने पहले ही चिंता जताई है। सरकार इस विशेष सत्र में परिसीमन को लेकर एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश करेगी। दूसरा सबसे बड़ा एजेंडा महिला आरक्षण बिल है। संसद ने साल 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। लेकिन यह बिल अभी तक लागू नहीं हो पाया है। कानून के मुताबिक यह आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। अब जब सरकार जनगणना 2026 की तैयारी कर रही है, तो महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का प्लान है कि विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को लागू करने का रोडमैप सदन में रखा जाए। इसमें यह साफ किया जाएगा कि परिसीमन के बाद जो नई सीटें बढ़ेंगी, उनमें से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे किसी भी मौजूदा सांसद की सीट पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा और आरक्षण को आसानी से लागू किया जा सकेगा। विपक्ष की नजर भी इस सत्र पर टिकी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाए और इसमें OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा दिया जाए। वहीं, DMK, BRS और अन्य दक्षिणी दल परिसीमन में जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों के साथ अन्याय न हो, इसकी गारंटी चाहते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सरकार विशेष सत्र में इन दोनों मुद्दों पर आम सहमति बना लेती है, तो यह 2029 के चुनाव से पहले एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक होगा। महिला आरक्षण लागू होने से देश की आधी आबादी का सीधा समर्थन सरकार को मिलेगा, जबकि परिसीमन पर चर्चा से सरकार संघीय ढांचे को मजबूत करने का संदेश देना चाहती है। फिलहाल संसद के विशेष सत्र की तारीखों को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह सत्र नवंबर के आखिरी हफ्ते में बुलाया जा सकता है। यह सत्र 5 से 7 दिन का हो सकता है। सरकार इससे पहले सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर एजेंडा तय करेगी।
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