बड़ा झटका! धर्म बदलते ही खत्म होगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आज 15 अक्टूबर को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा धर्म बदलने से आरक्षण नहीं मिलेगा।तमिलनाडु सरकार हिंदू से मुस्लिम बनने वालों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) में आरक्षण दे रही थी। मद्रास हाईकोर्ट ने इसे रद्द किया था। आज जस्टिस मिश्रा की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और कहा, हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू में जाने पर पिछड़ापन ट्रांसफर नहीं होता। धर्म बदलने मात्र से आरक्षण नहीं मिलेगा।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण और आरक्षण को लेकर देश का सबसे बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि धर्म बदलते ही आरक्षण और SC/ST का दर्जा अपने आप खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने 24 मार्च 2026 के अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के पैरा 3 के मुताबिक सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाला व्यक्ति ही अनुसूचित जाति (SC) माना जा सकता है। इसके अलावा ईसाई, इस्लाम या किसी अन्य धर्म में जाने वाला व्यक्ति तुरंत अपना SC स्टेटस खो देगा।
यह मामला आंध्र प्रदेश के एक पादरी चिंतादा आनंद का था। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को कहा था कि जाति व्यवस्था ईसाई धर्म में नहीं है, इसलिए ईसाई बनने के बाद कोई व्यक्ति SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा की मांग नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एन.वी. अंजारिया की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह रोक पूर्ण है और इसमें कोई अपवाद नहीं है। कोई व्यक्ति एक साथ क्लॉज 3 में बताए गए धर्म के अलावा दूसरा धर्म मानते हुए SC सदस्यता का दावा नहीं कर सकता।" कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी के पास पहले का SC सर्टिफिकेट भी है तो भी धर्म बदलने के बाद वह आरक्षण, नौकरी, या किसी भी सरकारी लाभ का हकदार नहीं होगा।
सर्टिफिकेट होना और कानूनी तौर पर हकदार होना दो अलग-अलग बातें हैं। बाद में इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दाखिल हुई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया और कहा कि फैसले में कोई गलती नहीं है। अब यह कानून बन चुका है। इसी कड़ी में आज 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए तमिलनाडु सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया जिसमें इस्लाम में धर्मांतरित लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) के तहत आरक्षण दिया जा रहा था। इसी कड़ी में आज 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए तमिलनाडु सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया जिसमें इस्लाम में धर्मांतरित लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) के तहत आरक्षण दिया जा रहा था।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा, "किसी व्यक्ति का सामाजिक पिछड़ापन हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में ट्रांसफर नहीं हो सकता।" यानी सिर्फ धर्म बदलने से आप पिछड़ा वर्ग का आरक्षण नहीं ले सकते। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति वापस हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में आता है तो उसे तीन बातें साबित करनी होंगी: पहले उसकी जाति क्या थी, इसका पुख्ता सबूत, वापस धर्म बदलना सच्चा और विश्वसनीय है, उसकी मूल जाति के समाज ने उसे फिर से स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद अब धर्मांतरण कर आरक्षण का लाभ लेने की प्रथा पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
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