IPRD में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया को किया आगाह, 'पुरानी विश्व व्यवस्था खत्म, नई अभी बनी नहीं...'
IPRD 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि समुद्र के तंग गलियारों, व्यापार मार्गों और चोक पॉइंट्स का हथियारीकरण पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गया है। सिंह ने कहा कि पुरानी विश्व व्यवस्था खत्म हो रही है और नई अभी बनी नहीं है। ऐसे में भारत को हाई अलर्ट पर रहना होगा। ड्रोन, AI और साइबर वारफेयर ने युद्ध का तरीका बदल दिया है, और भविष्य की ताकत तेज सोच और तकनीक से तय होगी।

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) 2026 को संबोधित करते हुए वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल ट्रेड रूट्स, समुद्री लेन और तंग गलियारों (Choke Points) का हथियारीकरण आज अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां पुरानी विश्व व्यवस्था तेजी से खत्म हो रही है और नई व्यवस्था का आकार अभी तय नहीं हुआ है। इस अस्थिर माहौल में हर देश को हाई अलर्ट पर रहने की जरूरत है।
राजनाथ सिंह ने हाल ही में जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2026 में भी इसी खतरे को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों और समुद्री चोक पॉइंट्स को हथियार बनाया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में अनिश्चितता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक व्यापार का 80% से ज्यादा हिस्सा समुद्र के रास्ते होता है। मलक्का स्ट्रेट, हॉर्मुज स्ट्रेट, बाब-अल-मंदेब और लाल सागर जैसे तंग गलियारे अगर किसी भी तरह से बाधित होते हैं, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इन रास्तों का हथियारीकरण वैश्विक व्यवस्था के पतन का कारण बन रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं है। अब युद्ध अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और इंफॉर्मेशन डोमेन तक फैल गया है। उन्होंने कहा कि अनमैन्ड सिस्टम और ड्रोन ने सैन्य अभियानों की गति, पैमाने और चरित्र को बदल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फैसलों को नया रूप दे रहा है, जबकि लंबी दूरी के सटीक हथियारों ने युद्ध के मैदान को कई गुना बढ़ा दिया है। भविष्य की सैन्य शक्ति प्लेटफॉर्म की संख्या से नहीं, बल्कि सेंस करने, समझने, निर्णय लेने और कार्रवाई करने की गति से तय होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपने पड़ोस और उससे आगे की घटनाओं पर लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने दोहराया कि आधुनिक राज-काज की कड़वी सच्चाई यह है कि कोई भी देश बिना अपने हथियार और तकनीक बनाए लंबे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकता। इसीलिए भारत ने आत्मनिर्भर भारत को राष्ट्रीय नीति बनाया है। इसका मतलब दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि देश में ही डिजाइन, विकसित और निर्माण करने की क्षमता बनाना है। उन्होंने कहा कि तरंग शक्ति जैसे अभ्यास क्षमता, तकनीक, इंटरऑपरेबिलिटी और विश्वास को ऑपरेशनल अनुभव में बदलते हैं और आज के समय में सामूहिक सीखना अब सिर्फ वांछनीय नहीं, बल्कि आवश्यक है।
विषय




