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मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · शाम 4:29 · नई दिल्ली संस्करण

समंदर में नहीं खत्म होगा भारतीय युद्धपोतों का ईंधन! राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया INS सूर्य, जानिए ताकत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज विशाखापत्तनम के HSL शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी Fleet Support Ship 'सूर्य' (FSS-1) को लॉन्च किया। 43,500 टन और 82% स्वदेशी सामग्री वाला यह जहाज समंदर में ही युद्धपोतों को ईंधन, गोला-बारूद और राशन देगा। 19,000 करोड़ की 5 जहाजों की इस सीरीज से हिंद महासागर में नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ेगी।

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
समंदर में नहीं खत्म होगा भारतीय युद्धपोतों का ईंधन! राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया INS सूर्य, जानिए ताकत

विशाखापत्तनम में आज भारतीय नौसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में नौसेना के पहले स्वदेशी Fleet Support Ship (FSS-1) 'सूर्य' को लॉन्च किया। इसी कार्यक्रम में उन्होंने पांचवें सपोर्ट शिप (FSS-5) की कील भी रखी और यार्ड के अपग्रेडेड Slipway-4 और 300 टन के विशाल Goliath Crane का उद्घाटन किया। यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा नौसैनिक लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट है। अगस्त 2023 में रक्षा मंत्रालय ने HSL के साथ 5 Fleet Support Ships बनाने के लिए करीब 19,000 करोड़ रुपये का करार किया था। INS सूर्य इसी सीरीज का पहला जहाज है।



INS सूर्य कोई लड़ाकू जहाज नहीं, बल्कि समंदर में चलता-फिरता पेट्रोल पंप और गोदाम है। इसका वजन 43,500 टन है और इसमें 82% स्वदेशी उपकरण लगे हैं। इसकी खासियतें: यह एक साथ कई युद्धपोतों को समंदर में ही ईंधन, पानी, गोला-बारूद और राशन सप्लाई कर सकता है। इससे INS विक्रांत, INS विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, विध्वंसक और फ्रिगेट्स को महीनों तक बिना बंदरगाह लौटे तैनात रखा जा सकेगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल रीच कई गुना बढ़ जाएगी। सिर्फ 18 महीने में स्टील कटिंग से लॉन्च तक पहुंचना HSL की तेज़ प्रगति को दिखाता है। 



राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, "आज एक ही जगह पर कील-ले, लॉन्च और स्लिपवे का उद्घाटन हो रहा है। कील-ले हमारे संकल्प का प्रतीक है, तो नया स्लिपवे हमारी बढ़ती क्षमता का।" अपग्रेडेड Slipway-4 की लंबाई और वजन सहने की क्षमता बढ़ा दी गई है। 300 टन की Goliath Crane के साथ अब HSL 45,000 DWT तक के भारी-भरकम जहाज बना और लॉन्च कर सकता है। अब भारत को बड़े टैंकर और युद्धपोतों के लिए विदेशी शिपयार्ड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस मौके पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार भी मौजूद रहे।



रक्षा मंत्री इसके बाद ओडिशा के कोरापुट में HAL के 2000वें एयरो-इंजन डिलीवरी समारोह में भी शामिल होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, FSS जैसे 5 जहाजों के बेड़े में शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना ब्लू वाटर नेवी के तौर पर और मजबूत होगी। इनकी डिलीवरी 2027 के मध्य से शुरू होगी। एक समय HSL को बंद होने की कगार पर माना जाता था, आज वही यार्ड देश की सबसे बड़ी नौसैनिक सपोर्ट शिप बना रहा है, यही नए भारत की तस्वीर है।

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