भारत ने रचा इतिहास: Cervavac को WHO से मिली मंजूरी, अब ग्लोबल होगी भारत की HPV वैक्सीन
भारत की पहली स्वदेशी HPV वैक्सीन Cervavac को WHO ने बड़ी मंजूरी दी है। पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई गई इस वैक्सीन को WHO ने Prequalification लिस्ट में शामिल किया है। अब इसे UN एजेंसियां खरीद कर दुनिया के दूसरे देशों में सप्लाई कर सकेंगी। यह 4 तरह के HPV वायरस से बचाती है और 9 से 26 साल के लड़के-लड़कियों को लगाई जा सकती है।

भारत के लिए गर्व का क्षण है। भारत की पहली स्वदेशी सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन Cervavac को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बड़ी मंजूरी दे दी है। WHO ने इसे Prequalification लिस्ट में शामिल कर लिया है। इसका मतलब है कि अब यह वैक्सीन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी उपलब्ध होगी। यह वैक्सीन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने बनाई है। यह भारत की पहली Gender-Neutral HPV वैक्सीन है। इस मंजूरी के साथ यह सीरम इंस्टीट्यूट का 32वां प्रोडक्ट बन गया है जिसे WHO से प्रीक्वालिफिकेशन मिला है।
WHO प्रीक्वालिफिकेशन कोई सामान्य अप्रूवल नहीं है। WHO यह सुनिश्चित करता है कि वैक्सीन क्वालिटी, सेफ्टी और असर के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है। एक बार इस लिस्ट में आने के बाद, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां जैसे UNICEF और GAVI इस वैक्सीन को खरीद सकती हैं और इसे दुनियाभर के गरीब और विकासशील देशों में सप्लाई कर सकती हैं। सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने कहा, "Cervavac को WHO प्रीक्वालिफिकेशन मिलना HPV के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह वैक्सीन की प्रभावशीलता को दर्शाता है और देशों को रोकथाम के प्रयासों को बढ़ाने का अवसर देता है।"
Cervavac एक Recombinant Quadrivalent HPV वैक्सीन (qHPV) है। यह HPV के 4 खतरनाक टाइप्स - 6, 11, 16 और 18 के खिलाफ सुरक्षा देती है। भारत में सर्वाइकल कैंसर का 80% से ज्यादा कारण HPV टाइप 16 और 18 ही हैं। यह वैक्सीन 9 से 26 साल की लड़कियों, लड़कों, महिलाओं और पुरुषों को लगाई जा सकती है। लड़कियों और महिलाओं में यह सर्वाइकल, वल्वल, वजाइनल और एनल कैंसर और जेनिटल वार्ट्स से बचाती है। लड़कों और पुरुषों में यह एनल कैंसर और जेनिटल वार्ट्स से बचाव करती है। इसे 9 से 14 साल के बच्चों को 2 डोज में और 15 से 26 साल के युवाओं को 3 डोज में दिया जाता है। इस वैक्सीन को भारत सरकार के DBT, BIRAC, IARC और गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया गया था।
यह मंजूरी ऐसे समय पर आई है जब भारत खुद सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के लगभग 80,000 नए मामले और 42,000 से ज्यादा मौतें होती हैं। यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। सरकार 14 साल की लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों के लिए HPV वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू कर रही है। अब तक सरकार GAVI से Gardasil वैक्सीन ले रही थी, लेकिन Cervavac को WHO मंजूरी मिलने के बाद अब भारत अपनी खुद की सस्ती वैक्सीन का इस्तेमाल कर सकेगा। प्राइवेट मार्केट में इसकी कीमत 2000 रुपये है, लेकिन सरकारी खरीद में यह 8 गुना तक सस्ती होगी। WHO की इस मंजूरी से भारत अब सिर्फ वैक्सीन का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया को सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाला ग्लोबल लीडर बन गया है।




