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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:16 · नई दिल्ली संस्करण

आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में HAL ने वायुसेना को सौंपी एयरोस्पेस शक्ति

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में HAL ने वायुसेना को सौंपी एयरोस्पेस शक्ति

भारत ने शुक्रवार को स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता के क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने भारतीय वायुसेना को एलसीए तेजस के एफओसी ट्विन सीटर ट्रेनर की अंतिम खेप और एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंपे। साथ ही, पवन हंस लिमिटेड को स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित ध्रुव एनजी नागरिक हेलीकॉप्टर प्रदान किया गया, जिसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से टाइप सर्टिफिकेशन भी मिला।

इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे, जिन्होंने एचएएल को भारत की एयरोस्पेस क्षमता निर्माण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि एचएएल ने विमान निर्माण, हेलीकॉप्टर विकास, रखरखाव, मरम्मत और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण क्षमताएं विकसित की हैं, और यह दिन भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता, तकनीकी आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। एलसीए एफओसी ट्रेनर की अंतिम खेप भारतीय वायुसेना को सौंपना देश के स्वदेशी सैन्य एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एलसीए तेजस एक 4.5 जेनरेशन का हल्का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसकी रेंज 3000 किलोमीटर है, जिसकी जद में पाकिस्तान के कई शहर आ सकते हैं।

एचएएल द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान भी भारतीय वायुसेना को सौंपा गया। इसमें आधुनिक एविएशन सिस्टम और सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं, जो प्रशिक्षण की जरूरतों के अनुरूप हैं। इसके स्वदेशी निर्माण से बेसिक एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग में विदेशी निर्भरता कम होगी और इसमें निर्यात की भी संभावनाएं हैं। ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर के क्षेत्र में भी भारत ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। इसमें स्वदेशी शक्ति इंजन शामिल है, जिसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से प्रमाणन मिला है। इसका उपयोग पहली बार समुद्र में तेल और गैस संबंधी अभियानों के लिए किया जाएगा, जिससे भारत की नागरिक एयरोस्पेस क्षमता को और मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्री ने एचएएल को डिजाइन, विकास, निर्माण, प्रमाणन, पूरे सेवा-काल के दौरान सहायता और ग्लोबल मार्केटिंग जैसे सभी क्षेत्रों में विश्वस्तरीय क्षमता प्रदर्शित करने वाले संगठन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले दशक में ग्लोबल एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल करने के लिए नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी, क्योंकि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य में हवाई अभियान सूचना और तकनीक पर आधारित होंगे।

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