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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:16 · नई दिल्ली संस्करण

Big Breaking: रक्षा क्षेत्र में राजनाथ सिंह का इस ऐतिहासिक फैसलें से दुश्मनों के बढ़ने जा रही मुश्किलें

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
Big Breaking: रक्षा क्षेत्र में राजनाथ सिंह का इस ऐतिहासिक फैसलें से दुश्मनों के बढ़ने जा रही मुश्किलें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र (ToT) को घरेलू रक्षा उद्योग को सौंपने की मंज़ूरी दे दी है। टेक्नोलॉजी के इस ट्रांसफ़र से देश में ही इन मिसाइल सिस्टम के स्वदेशी उत्पादन का रास्ता साफ़ होगा।

पहले, ये टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों तक ही सीमित थीं। अब, प्राइवेट कंपनियाँ भी इन्हें बना पाएँगी। यह कदम डिफेंस सेक्टर में "आत्मनिर्भर भारत" के विज़न को मज़बूत करने के लिए उठाया गया है। इस फ़ैसले से भारतीय कंपनियाँ देश में ही एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम बना पाएँगी, बशर्ते वे ज़रूरी क्वालिफ़िकेशन, सर्टिफ़िकेशन और रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करें और सभी अनिवार्य स्टैंडर्ड्स का पालन करें। DRDO अब अपना ध्यान मिसाइल डेवलपमेंट से हटाकर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बढ़ाने पर लगाएगा, जिससे घरेलू इंडस्ट्री की क्षमताओं का पूरा फ़ायदा उठाया जा सके और देश में मिसाइल बनाने की पूरी चेन को मज़बूत किया जा सके।

माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) और दूसरे टेक्नोलॉजी पार्टनर सप्लाई चेन से जुड़ सकेंगे, जिससे नए मौके खुलेंगे और रोज़गार के नए रास्ते बनेंगे। इस पहल का मुख्य मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाना, भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मज़बूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। अभी देश कई एडवांस्ड हथियार प्रणालियों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर है। भारतीय कंपनियों को यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करके, देश अपनी ज़रूरत की मिसाइलों का उत्पादन खुद कर सकेगा। इससे न सिर्फ़ विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में बिना रुकावट सप्लाई भी सुनिश्चित होगी।

इसके अलावा, डिफेंस प्रोडक्शन में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ने से इनोवेशन और कॉम्पिटिशन को बढ़ावा मिलेगा। यह फ़ैसला DRDO की उस व्यापक नीति के अनुरूप है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विकसित टेक्नोलॉजी को प्रभावी ढंग से इंडस्ट्री तक पहुंचाया जाए। पारंपरिक मिसाइल सिस्टम में पहले से विकसित कई तरह की मिसाइलें शामिल हैं। इनके स्थानीय स्तर पर उत्पादन से भारतीय सशस्त्र बलों को तेज़ी से आधुनिक हथियार मिल सकेंगे। मिसाइल सप्लाई चेन में MSME को शामिल करने से पूरे सेक्टर में कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कंपनियाँ नई तकनीकों में महारत हासिल कर पाएँगी और वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बना पाएँगी।

प्रोडक्शन शुरू करने के लिए, कंपनियों को सबसे पहले ज़रूरी योग्यता और सर्टिफ़िकेशन हासिल करने होंगे। इस प्रोसेस से डिफेंस सेक्टर ज़्यादा खुला और कॉम्पिटिटिव बनेगा। लंबे समय में, भारत न सिर्फ़ अपनी ज़रूरतें पूरी करेगा, बल्कि मिसाइल टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट करने की स्थिति में भी आ जाएगा। राजनाथ सिंह का फ़ैसला आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम है, जो देश की डिफेंस क्षमताओं को मज़बूत करने के साथ-साथ घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देगा। यह भारतीय कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने का एक अहम मौका है।

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