पराली संकट पर केंद्र सख्त, भूपेंद्र यादव-शिवराज की बैठक में मिशन मोड का प्लान
पराली जलाने पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शिवराज चौहान ने आंकड़े जारी किए।15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच हरियाणा में 53.3% और UP में 32% की कमी आई है। पंजाब में भी गिरावट दर्ज हुई।लेकिन MP में 55 से बढ़कर 277 (452% वृद्धि) और राजस्थान में 20 से 60 (200% वृद्धि) मामले बढ़े, जिसे केंद्र ने चिंताजनक बताया। सरकार ने सैटेलाइट निगरानी तेज करने और 3.54 लाख मशीनें देने की जानकारी दी।

धान कटाई के सीजन के बीच पराली जलाने को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी समीक्षा बैठक की। कृषि भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक में इस साल के आंकड़े रखे गए। बैठक में बताया गया कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शिवराज चौहान द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक- हरियाणा में 53.3% की कमी, उत्तर प्रदेश में लगभग 32% की कमी दर्ज की गई है। पंजाब में भी पिछले साल की तुलना में गिरावट आई है।
हालांकि दो राज्यों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 हो गए हैं, जो 452% की वृद्धि है। वहीं राजस्थान में यह संख्या 20 से बढ़कर 60 हो गई है, यानी 200% की बढ़ोतरी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी फसल की कटाई का बड़ा हिस्सा बाकी है। इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, उन्हें भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। पराली रोकथाम की असली परीक्षा अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक होगी, जब धान कटाई और गेहूं बुवाई एक साथ होगी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सैटेलाइट निगरानी और ग्राउंड पेट्रोलिंग तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला, गुरदासपुर और हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, फतेहाबाद जिलों में विशेष निगरानी पर जोर दिया। साथ ही CAQM और CPCB के साथ आंकड़ों को बेहतर तरीके से जोड़ने को कहा। केंद्र सरकार अब तक राज्यों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 3.54 लाख से अधिक मशीनें दे चुकी है। 2018-19 से 2025-26 के बीच इस योजना के तहत 4,266.47 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें भी दी गई हैं। लेकिन एक केंद्रीय सर्वे में सामने आया कि पंजाब में करीब 40% और हरियाणा में 48% पुरानी मशीनें बंद या खराब पड़ी हैं, जो बड़ी चुनौती है।
बैठक में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान और दिल्ली-NCR को 'मिशन मोड' में काम करने को कहा गया है। किसानों को पराली से बिजली, बायो-CNG और खाद बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि पराली समस्या नहीं बल्कि कमाई का जरिया बने।
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