दिल्ली के प्रदूषण में बढ़ा इस खतरनाक बीमारी का खतरा, कहीं आपको तो नहीं?
प्रदूषण बढ़ते ही लगातार छींक, नाक बहना और खुजली हो तो यह सामान्य जुकाम नहीं, बल्कि एलर्जिक राइनाइटिस हो सकती है। यह बीमारी धूल, धुएं, PM2.5 और पराग कणों से होती है, जब इम्यून सिस्टम हिस्टामाइन छोड़ता है। इसके लक्षणों में पतला पानी आना, आंखों में जलन, गले में खराश है, बुखार नहीं होता। बचाव के लिए N95 मास्क पहनें, घर में गीले कपड़े से सफाई करें और लक्षण बढ़ने पर ENT डॉक्टर से मिलें।

दिल्ली-NCR में सर्दी शुरू होते ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने लगा है। सुबह-शाम धुंध, आंखों में जलन और गले में खराश के साथ-साथ अगर आपको लगातार छींक आना, नाक बहना, नाक बंद होना और नाक-आंखों में खुजली की समस्या हो रही है, तो इसे सिर्फ सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज न करें। यह एलर्जिक राइनाइटिस (Allergic Rhinitis) की बीमारी हो सकती है, जिसे आम भाषा में हे फीवर भी कहते हैं। ये एक एलर्जी की स्थिति है जो तब होती है जब आपका इम्यून सिस्टम हवा में मौजूद कुछ कणों को खतरनाक समझ लेता है। प्रदूषण के साथ हवा में PM2.5, धूल, धुएं, पराग कण (Pollen) और फंगस के कण बढ़ जाते हैं। जब ये कण सांस के जरिए नाक में जाते हैं, तो शरीर हिस्टामाइन नामक केमिकल छोड़ता है।
इसी के कारण नाक में सूजन, छींक और खुजली शुरू हो जाती है।डॉक्टरों के अनुसार, अक्टूबर से जनवरी के बीच इस बीमारी के मामले 40% तक बढ़ जाते हैं, क्योंकि इस दौरान पराली का धुआं, दिवाली के पटाखों का धुआं और कोहरे के साथ प्रदूषण मिलकर हवा को जहरीला बना देता है। इसके लक्षण क्या हैं? लगातार छींकें: सुबह उठते ही 10-15 छींकें एक साथ आना। नाक से जुड़े लक्षण: नाक से पतला पानी जैसा बहना, नाक का बंद हो जाना, नाक में तेज खुजली। आंखों और गले पर असर: आंखों में खुजली, पानी आना और लाल होना, गले में खराश और खुजली। अन्य लक्षण: कान बंद लगना, सिरदर्द, थकान और नींद न आना। कई लोगों में ये लक्षण पूरे साल रहते हैं, तो कुछ में सिर्फ प्रदूषण बढ़ने पर।
सामान्य सर्दी में नाक से गाढ़ा पीला बलगम आता है और बुखार भी होता है, लेकिन एलर्जिक राइनाइटिस में बुखार नहीं होता और नाक से साफ पानी आता है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा है, जिनके परिवार में एलर्जी की हिस्ट्री है, और जो लोग ज्यादा समय बाहर बाइक या खुले में बिताते हैं, उन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। N95 मास्क पहनें: घर से बाहर निकलते समय साधारण कपड़े वाला मास्क नहीं, बल्कि N95 मास्क पहनें। यह PM2.5 को 95% तक रोकता है। घर को रखें साफ: घर में रोज झाड़ू की जगह वैक्यूम क्लीनर और गीले कपड़े से पोछा लगाएं। सुबह 5-8 बजे के बीच खिड़कियां बंद रखें, क्योंकि इस समय प्रदूषण पीक पर होता है।
भाप लें: दिन में 2 बार भाप (Steam) लेने से नाक की सूजन कम होती है। एयर प्यूरीफायर: अगर संभव हो तो घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और AC के फिल्टर को हर 15 दिन में साफ करें। डॉक्टर से कब मिलें: अगर लक्षण 1 हफ्ते से ज्यादा रहें, सांस लेने में तकलीफ हो या नाक पूरी तरह बंद हो जाए, तो तुरंत ENT या एलर्जी स्पेशलिस्ट से मिलें। डॉक्टर एंटी-एलर्जी दवाएं और नेजल स्प्रे देते हैं। खुद से दवा न लें। प्रदूषण से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी से आप इस एलर्जी से खुद को और अपने परिवार को बचा सकते हैं।




