'आप Gen-Z नहीं हैं' - सौरव-रांका को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, वापस ली अर्जी
दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार के बाद CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी अर्जी वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने पूछा, जब जंतर-मंतर पर इजाजत नहीं थी तो क्यों गए? आपने शांति बॉन्ड तोड़ा है और आप Gen-Z भी नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि SEM के आदेश के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट के पास विकल्प है, सीधे हाईकोर्ट क्यों आए? 10 और 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बिना इजाजत प्रदर्शन के आरोप में दोनों हिरासत में हैं।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हाईकोर्ट से जोरदार फटकार लगी है। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान पूछा - जब जंतर-मंतर डी-नोटिफाई है और इजाजत नहीं थी, तो आप वहां क्यों गए? दरअसल, सौरव दास और आशुतोष रांका ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों की न्यायिक हिरासत आज 21 अक्टूबर को खत्म हो रही थी। SEM कोर्ट ने 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत 2 दिन के लिए बढ़ा दी थी, इसी के खिलाफ वे हाईकोर्ट पहुंचे थे।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि आपने पहली गिरफ्तारी के बाद दिया गया 50,000 रुपये का शांति बॉन्ड तोड़ा है। जब पहली बार छोड़ दिया गया था तो दूसरी बार क्यों बैरिकेड तोड़कर जंतर-मंतर गए? बॉन्ड की शर्तों पर जोर देना गैरकानूनी कैसे हो सकता है? सुनवाई में जज ने दोनों की उम्र पूछी। वकील ने बताया सौरव 27 साल और आशुतोष 31 साल के हैं। इस पर जज ने टिप्पणी की - आप Gen-Z नहीं हैं, आप समझदार हैं। आपको कानून पता होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, आप प्रोटेस्ट में सबसे आगे रहते हैं। जब आप बैरिकेड तोड़ते हैं तो सैकड़ों लोग आपके पीछे आते हैं, जिनमें कुछ आपके कंट्रोल में भी नहीं होते। कोर्ट ने फ्रांस समेत दूसरे देशों के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कैसे हिंसा और आगजनी में बदल गया, हमने देखा है।
हाईकोर्ट ने CJP के वकील अभिक चिमनी से पूछा कि जब SEM के आदेश के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट के पास रिवीजन का विकल्प है, तो सीधे हाईकोर्ट क्यों आए? आज दोपहर 2 बजे SEM कोर्ट में सुनवाई होनी है, इतनी जल्दी क्या थी? CJP के नेता मतदाता सूची के स्पेशल गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितता और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहते थे। 10 अक्टूबर को सौरव, आशुतोष समेत कई नेताओं को दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 से ही हिरासत में ले लिया गया था। अगले दिन 50,000 के मुचलके पर रिहा किया गया। 13 अक्टूबर को फिर ये नेता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर में बिना इजाजत घुसने की कोशिश में पकड़े गए।
पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बैरिकेड तोड़े और पुलिसकर्मियों को ड्यूटी से रोका। इसके बाद 14 अक्टूबर को उन्हें औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जिसे बाद में 2 दिन और बढ़ा दिया गया। SEM ने कहा था कि इनकी जमानत के दस्तावेजों में भी गड़बड़ी है। हाईकोर्ट की फटकार और SEM कोर्ट में सुनवाई का इंतजार करने के सुझाव के बाद CJP के वकील ने याचिका वापस ले ली। अब मामले पर अगली सुनवाई दोपहर 2 बजे SEM कोर्ट में होगी, वहीं तय होगा कि दोनों को रिहा किया जाएगा या हिरासत और बढ़ेगी।
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