लेहरा दो तिरंगा से पहले गिरफ्तारी, अब कोर्ट से इस शर्त पर रिहा हुए CJP नेता अभिजीत दिपके
दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP प्रमुख अभिजीत दिपके को जमानत दे दी है। शुक्रवार को 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले पुलिस ने उन्हें झंडेवालान स्थित घर से हिरासत में लिया था। पुलिस ने BNSS की धारा 163 का हवाला देते हुए दो नोटिस दिए थे और कहा था कि कनॉट प्लेस प्रोटेस्ट साइट नहीं है। बाद में उन्हें जाफरपुर कलां थाने ले जाकर गिरफ्तार किया गया था। आज कोर्ट में पेशी के बाद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।

शुक्रवार को तिरंगा मार्च से ठीक पहले उन्हें हिरासत में लिया गया था और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। आज शनिवार को उन्हें मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। दरअसल, Cockroach Janta Party (CJP) ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च का ऐलान किया था। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) में कथित गड़बड़ी को लेकर था। इससे पहले 13 अक्टूबर को CJP के दो नेता सौरव दास और आशुतोष रंका जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के आरोप में हिरासत में लिए गए थे और उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया था। उसी के विरोध में CJP ने यह तिरंगा मार्च बुलाया था।
दिल्ली पुलिस ने मार्च से पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी। पुलिस के मुताबिक कनॉट प्लेस में BNSS की धारा 163 लागू है और वहां प्रदर्शन की परमिशन नहीं है। इसी आधार पर 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुबह अभिजीत दिपके के झंडेवालान स्थित घर पहुंचे और उन्हें दो नोटिस दिए। पहला नोटिस नई दिल्ली जिले की तरफ से था, जिसमें कहा गया था कि सेंट्रल पार्क नोटिफाइड प्रोटेस्ट साइट नहीं है और वहां मार्च करने से 15 लाख से ज्यादा व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी होगी, भगदड़ का खतरा है। दूसरा नोटिस साउथ-वेस्ट जिले की तरफ से था, जिसमें 10 अक्टूबर को साइन किए गए बॉन्ड का हवाला दिया गया था कि एक साल तक शांति बनाए रखनी है।
नोटिस के बावजूद जब दिपके मार्च के लिए निकले तो पुलिस ने उन्हें NCP (SP) प्रवक्ता अनीश गवांडे के घर के बाहर से प्रिवेंटिव कस्टडी में ले लिया। उन्हें करीब 60 किलोमीटर दूर जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया। पुलिस ने कहा कि यह गिरफ्तारी BNSS की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग की आशंका में की गई है। शुक्रवार को पूरे सेंट्रल दिल्ली में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। करीब 6000 दिल्ली पुलिस के जवान और 220 से ज्यादा CAPF की कंपनियां तैनात की गई थीं। NDMC ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद कर दिया था। RAF, वज्र वाहन और आंसू गैस की गाड़ियां भी तैनात थीं। इसके बावजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारी तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में पहुंचे।
AISA प्रमुख नेहा बोरा को भी मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक कुल 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। आज शनिवार को दिपके को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया। CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने X पर बताया था कि पुलिस उन्हें अनजान जगह ले गई है और वकीलों से मिलने नहीं दिया जा रहा। कोर्ट में दलील दी गई कि शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। CJP समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताया है।




