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गुरुवार, 5 नवंबर 2026 · शाम 5:10 · नई दिल्ली संस्करण

चुनाव आयोग का नया अंदाज! विदेश यात्रा से लेकर IT सिस्टम तक हर फैसला होगा दर्ज, हर बैठक का बनेगा रिकॉर्ड

चुनाव आयोग में काम का तरीका बदल गया है। अब बैठकों से पहले एजेंडा मिलेगा और बाद में मिनट्स जारी होंगे। 26 सितंबर की बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों ने ये फैसला लिया। अब अधिकारियों को विदेश यात्रा के लिए आयोग से मंजूरी लेनी होगी। नया आईटी मॉड्यूल पहले कमेटी की जांच के बाद ही आयोग के सामने आएगा। ECINet की समीक्षा के लिए भी कमेटी बनी है। SIR में फॉर्म-6 से Annexure-D अलग कर दिया गया है। मकसद पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
चुनाव आयोग का नया अंदाज! विदेश यात्रा से लेकर IT सिस्टम तक हर फैसला होगा दर्ज, हर बैठक का बनेगा रिकॉर्ड

चुनाव आयोग यानी EC में पिछले कुछ हफ्तों में काम करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब आयोग की बैठकों में जो कुछ होगा, वो अचानक नहीं होगा। बैठक से पहले एजेंडा सबको मिलेगा और बैठक के बाद क्या तय हुआ, उसके मिनट्स भी जारी होंगे। यानी अब हर फैसला फाइलों में दबा नहीं रहेगा, उसका लिखित हिसाब होगा। दरअसल, 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मौजूदगी में एक बड़ी बैठक हुई थी। उसी बैठक में ये तय हुआ कि आयोग के अंदर कामकाज को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा। इससे पहले आयोग में कई फैसले बिना लिखित एजेंडा और बिना मिनट्स के हो जाते थे। अब ऐसा नहीं होगा।


नए नियमों के मुताबिक, अब आयोग की कोई भी बैठक होगी तो उसका एजेंडा पहले से सभी सदस्यों को दिया जाएगा। बैठक के बाद उसमें हुई चर्चा और लिए गए फैसलों का पूरा रिकॉर्ड मिनट्स के रूप में जारी किया जाएगा। साथ ही चुनाव आयुक्तों की तरफ से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। यानी आयुक्तों ने कुछ कहा तो अधिकारी उसे टाल नहीं सकेंगे। इतना ही नहीं, अब आयोग के अधिकारियों को विदेश यात्रा पर जाने से पहले आयोग से मंजूरी लेनी होगी। पहले ऐसा नियम नहीं था। अधिकारियों को अपनी यात्रा के लिए पहले से अनुमति लेनी होगी और उसका मकसद भी बताना होगा। 


एक और बड़ा बदलाव आईटी सिस्टम को लेकर हुआ है। अब कोई भी नया आईटी मॉड्यूल सीधे आयोग के सामने नहीं रखा जाएगा। पहले उसे अधिकारियों की एक कमेटी के पास भेजा जाएगा। कमेटी उसकी जांच करेगी और मंजूरी मिलने के बाद ही उसे आयोग के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा वोटर लिस्ट से जुड़े डिजिटल सिस्टम ECINet की भी समीक्षा का फैसला लिया गया है। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त करेंगे। इसमें IIT और IIIT के एक्सपर्ट भी शामिल होंगे। ये कमेटी देखेगी कि ECINet ठीक से काम कर रहा है या नहीं और उसमें क्या सुधार चाहिए।


ये बदलाव ऐसे ही नहीं आए। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में आयोग के अंदर ही कई फैसलों पर असहमति की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि करीब 10 महीने में 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई गई थी। सबसे ज्यादा सवाल SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और फॉर्म-6 को लेकर उठे थे। आयुक्तों का कहना था कि फॉर्म-6 का ढांचा मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत तय होता है, जिसमें बदलाव का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। इसी आपत्ति के बाद 4 नवंबर को आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए मतदाताओं के लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी Annexure-D की बाध्यता अलग कर दी। अब घोषणा पत्र फॉर्म का हिस्सा नहीं होगा, बल्कि अलग से भरा जाएगा।


कुल मिलाकर, आयोग अब ये संदेश देना चाहता है कि उसके सारे फैसले सर्वसम्मति से और पूरी पारदर्शिता के साथ लिए जा रहे हैं। बैठकों का एजेंडा और मिनट्स जारी करने से जवाबदेही बढ़ेगी और बाहर से उठ रहे सवालों का जवाब भी रिकॉर्ड में मिलेगा। अब देखना ये है कि ये नए नियम जमीन पर कितने असरदार होते हैं। क्योंकि कागज पर नियम बनाना आसान है, असली परीक्षा तो उनके पालन में ही है।

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