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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:11 · नई दिल्ली संस्करण

CJI को 2000 लोगों की चिट्ठी! SIR पर रोक लगाओ, चुनाव आयोग की जांच कराओ - योगेंद्र यादव की बड़ी मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
CJI को 2000 लोगों की चिट्ठी! SIR पर रोक लगाओ, चुनाव आयोग की जांच कराओ - योगेंद्र यादव की बड़ी मांग

देश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद जवाहर सरकार समेत 2000 से ज्यादा नागरिकों ने भारत के नए चीफ जस्टिस (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को एक खुला पत्र लिखकर SIR की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। यह पत्र रविवार, 28 सितंबर 2026 को CJI को भेजा गया है। पत्र में नागरिकों ने मांग की है कि जब तक SIR की वैधता और उसकी प्रक्रिया की पूरी समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक इस पर रोक लगाई जाए। साथ ही चुनाव आयोग की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करे।

SIR की संवैधानिक वैधता और अपनाई जा रही प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा होने तक इसे रोका जाए। वोटर रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित तौर पर किए गए अनधिकृत बदलावों की कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। चुनाव आयोग के नए IT सिस्टम ECI-Net का सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति से सिक्योरिटी और लीगल ऑडिट कराया जाए। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में बड़े नाम शामिल हैं। इनमें पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व IAS अधिकारी अदिति मेहता, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी, अभिनेता प्रकाश राज, शिक्षाविद, वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा बिहार सहित कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का काम चल रहा है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं, नोटिस सही से नहीं पहुंच रहे हैं और नए IT मॉड्यूल को बिना समीक्षा के लागू कर दिया गया है। योगेंद्र यादव पहले भी इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन कोर्ट ने SIR को चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार बताते हुए इसे बरकरार रखा था। योगेंद्र यादव ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि कोर्ट ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी छोड़ दी है, जिस पर बीजेपी ने उन्हें आड़े हाथों लिया था।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने शनिवार को अपनी बैठक में 9 बड़े फैसले लिए हैं। आयोग ने कहा है कि अब से बैठकों से पहले एजेंडा साझा किया जाएगा और फैसलों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। साथ ही नए IT मॉड्यूल और पोर्टल को लागू करने से पहले उनकी समीक्षा की जाएगी। बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। अब देखना यह होगा कि CJI सूर्यकांत 2000 लोगों के इस पत्र पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देगा या SIR की प्रक्रिया जारी रहेगी?

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