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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:11 · नई दिल्ली संस्करण

Maharashtra CEO vs ECINet: वोटर लिस्ट विवाद में महाराष्ट्र CEO ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
Maharashtra CEO vs ECINet: वोटर लिस्ट विवाद में महाराष्ट्र CEO ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी

चुनाव आयोग के नए सॉफ्टवेयर ECINet को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। अब महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. चोकालिंगम ने भी चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर इस सिस्टम पर सवाल उठाए हैं और 5 बड़े बदलाव की मांग की है। खास बात ये है कि उन्होंने वही मुद्दे उठाए हैं, जो कुछ दिन पहले दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उठाए थे। एस. चोकालिंगम ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग के सीनियर अधिकारियों को ईमेल भेजा था। ये चिट्ठी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया नोटिस फेज में है और जल्द ही दावे-आपत्तियों की सुनवाई शुरू होनी है।

CEO का कहना है कि ECINet में ERO को ये तय करने का विकल्प दिया जाए कि किस वोटर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना है और किसे छूट देनी है। अगर वोटर ने BLO के जरिए पर्याप्त कागज जमा कर दिए हैं तो उसे दफ्तर के चक्कर न लगाने पड़ें। फिलहाल ECINet सिर्फ आयोग की तय लिस्ट वाले कागज ही स्वीकार करता है। CEO ने मांग की है कि वोटर ऐसे दूसरे दस्तावेज भी जमा कर सके जो उसकी पहचान साबित करते हों, भले ही वो लिस्ट में न हों। SIR में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का मतलब है वोटर की मौजूदा जानकारी और पुरानी लिस्ट में अंतर, जैसे नाम, सरनेम या माता-पिता के नाम में फर्क। अभी ERO ऐसे मामले में सिर्फ BLO के बयान पर फैसला नहीं कर सकता, उसे DEO के पास भेजना पड़ता है।

CEO चाहते हैं कि अगर ERO सबूत से संतुष्ट है तो वो खुद फैसला ले सके, क्योंकि कानूनन मतदाता सूची की जिम्मेदारी ERO की ही है। अभी हर लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले केस में ‘पिछले SIR का Extract’ अपलोड करना अनिवार्य है। CEO का तर्क है कि विसंगति तो पहले ही पुरानी लिस्ट से पकड़ी जा चुकी है, इसलिए इसे वैकल्पिक किया जाए। ERO के पास प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं। सिर्फ मौखिक निर्देश काफी नहीं हैं। आयोग एक विस्तृत FAQ जारी करे जिसमें नोटिस, दस्तावेज जमा, सुनवाई और निपटारे की पूरी प्रक्रिया साफ लिखी हो।

दरअसल कानून के मुताबिक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम 1960 के तहत वोटर लिस्ट जोड़ने-हटाने का असली अधिकार ERO का है, जो आमतौर पर SDM स्तर का अधिकारी होता है। ये व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि एक जगह से पूरी लिस्ट कंट्रोल न हो। लेकिन व्यवहार में ERO वही कर सकता है जो सॉफ्टवेयर करने देता है। ECINet 22 जनवरी 2026 को लॉन्च हुआ था जिसमें 40 से ज्यादा पोर्टल को एक जगह लाया गया। इसका कंट्रोल दिल्ली में IT विभाग के पास है। इसी को लेकर चुनाव आयुक्तों ने भी सवाल उठाए थे कि क्या ERO को पूरा एक्सेस मिल रहा है।

26 सितंबर को चुनाव आयोग की फुल बैठक के बाद जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि महाराष्ट्र CEO की कुछ मांगें मान ली गई हैं। अब ERO कुछ मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई से छूट दे सकेगा, BLO घर जाकर कागज लेगा और उसे अपलोड करेगा। सुनवाई केवल जरूरी मामलों में और संभव हो तो ऑनलाइन होगी। आयोग ने कहा कि फील्ड से आए सुझावों पर पहले भी बदलाव किए गए हैं और आगे भी किए जाएंगे।

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