UP की कमान प्रियंका के हाथ: सपा से 125 सीटों पर डील का मेगा प्लान, 3 घंटे मंथन के बाद बनाया जीत का ये रोडमैप
प्रियंका गांधी ने यूपी की कमान संभालते हुए मिशन 2027 का मेगा प्लान बनाया। दिल्ली में कोर टीम के साथ बैठक में दिवाली बाद 4 कमेटियां बनाने का फैसला हुआ, जिसमें घोषणापत्र और गठबंधन समन्वय समिति शामिल हैं। सबसे बड़ा फोकस सपा से सीट शेयरिंग है। कांग्रेस 125-150 सीटों का टारगेट लेकर 175 सीटों पर मंथन कर रही है। अखिलेश से सीधी बातचीत प्रियंका ही करेंगी, हालांकि सपा 60-65 से ज्यादा देने को तैयार नहीं।

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। पार्टी हाईकमान ने यूपी की पूरी कमान एक बार फिर प्रियंका गांधी वाड्रा के हाथों में सौंप दी है। रामलीला मैदान की मेगा रैली के अगले ही दिन प्रियंका ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर यूपी कांग्रेस की कोर टीम के साथ बंद कमरे में मैराथन बैठक की और मिशन 2027 का मेगा प्लान तैयार किया। बैठक में तय हुआ कि दिवाली के तुरंत बाद कांग्रेस यूपी के लिए 4 अहम कमेटियों का गठन करेगी - घोषणापत्र समिति, चुनावी प्रबंधन समिति, विधानसभा प्रचार समिति और सबसे अहम कोऑर्डिनेशन / गठबंधन समन्वय समिति।
इस बैठक में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद मौजूद रहे। इन सभी कमेटियों की लिस्ट को अंतिम मंजूरी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास भेजा गया है। इस प्लान का सबसे बड़ा फोकस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस इस बार 125 से 150 सीटों पर दावा ठोकने जा रही है। प्रियंका ने नेताओं के साथ करीब 3 घंटे तक 175 संभावित सीटों पर मंथन किया है। कांग्रेस ने इन सीटों को तीन कैटेगरी में बांटा है: Category A (100 सीटें): जहां कांग्रेस खुद को सबसे मजबूत मानती है, कोई समझौता नहीं।
Category B (40-50 सीटें): जहां बातचीत की गुंजाइश है। Category C (25-35 सीटें): जहां फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा। पार्टी की रणनीति हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक विधानसभा सीट लड़ने की है। साथ ही अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर की उन सीटों पर भी दावा किया जाएगा जहां अभी सपा के विधायक हैं। यह लिस्ट 2024 लोकसभा और 2017 विधानसभा चुनावों के डेटा के आधार पर बनाई गई है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सीट शेयरिंग की पूरी बातचीत की कमान खुद प्रियंका गांधी संभालेंगी। पार्टी मानती है कि वह राहुल गांधी की टीम से ज्यादा सख्त नेगोशिएटर हैं और अखिलेश के साथ आराधना मिश्रा के अच्छे संबंधों से डील आसान होगी।
लेकिन पेंच भी बड़ा है। अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि सीट बंटवारा सिर्फ 'Winnability' यानी जीतने की क्षमता के आधार पर होगा। सपा कांग्रेस को 60-65 सीटों से ज्यादा देने के मूड में नहीं है, जबकि वह खुद 403 में से करीब 350 सीटों पर तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस प्रभारी गौतम का कहना है कि पार्टी को कम से कम 150 सीटें मिलनी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रियंका की यह नई रणनीति 2017 जैसी गलती दोहराने से बच पाती है या नहीं, और क्या नवंबर तक इंडिया गठबंधन का फॉर्मूला फाइनल हो पाएगा।
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