उत्तराखंड में सियासी भूचाल: मंत्री रेखा आर्य ने पति पर लगाए थे ये 5 बड़े आरोप, झांसी से हुए गिरफ्तार...
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू को देहरादून पुलिस ने झांसी से गिरफ्तार किया। रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर को कैंट थाने में FIR दर्ज कराई थी। आरोप था कि 2004 में पहली शादी छिपाकर धोखे से शादी की, मारपीट, जातिसूचक अपमान, धोखाधड़ी और ऑडियो में हत्या की साजिश रची। हाईकोर्ट ने 4 नवंबर को FIR रद्द करने की याचिका खारिज की थी। SIT के 3 नोटिस के बाद भी पेश न होने पर NBW जारी हुआ था। साहू ने पत्नी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

उत्तराखंड की सियासत में पिछले एक महीने से चल रहा हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद अब गिरफ्तारी तक पहुंच गया है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। देहरादून पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के झांसी से पकड़ा है। पत्नी की शिकायत पर गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे थे। दरअसल, उत्तराखंड सरकार में महिला एवं बाल कल्याण, महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
अपनी शिकायत में उन्होंने पति पर उत्पीड़न, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया था, जिसकी कमान जया बलूनी संभाल रही हैं। रेखा आर्य ने आरोप लगाया है कि गिरधारी लाल साहू ने साल 2004 में शादी के वक्त अपनी पहली शादी और बच्चों की बात छिपाई थी। उन्होंने खुद को अविवाहित बताकर उनसे विवाह किया था। शादी के बाद अन्य महिलाओं से अवैध संबंध रखने और विरोध करने पर मारपीट, गालीगलौज और जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
शिकायत में सबसे सनसनीखेज आरोप एक ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर है। रेखा आर्य का दावा है कि उन्हें एक ऑडियो मिला है, जिसमें उनके पति किसी अन्य महिला के साथ मिलकर उनकी और उनके बच्चों की हत्या की साजिश रच रहे हैं और इसके लिए पैसे खर्च करने की बात कर रहे हैं। इसके अलावा फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के जरिए उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाने और 80 प्रतिशत शेयर बेचने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने इस शिकायत पर आईपीसी की धाराओं 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504, 506 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए गिरधारी लाल साहू ने पहले अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद 4 नवंबर को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने कहा था कि यह मामला केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूटरचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि 22 साल का पुराना रिश्ता होने मात्र से बाद में हुए अपराधों को खारिज नहीं किया जा सकता। ऑडियो और दस्तावेजों की सत्यता जांच और ट्रायल का विषय है।
एसआईटी ने तीन बार नोटिस देकर साहू को बयान देने के लिए बुलाया, लेकिन वह पेश नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट से गैर जमानती वारंट हासिल किया और अलग-अलग टीमों को उनकी तलाश में भेजा। आखिरकार झांसी से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने भी अपनी पत्नी रेखा आर्य पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि मंत्री बनने के बाद रेखा आर्य ने 210 करोड़ की अवैध संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने इन आरोपों को गलत और साजिश बताया था। एफआईआर दर्ज कराने के बाद रेखा आर्य ने फेसबुक पर एक वीडियो और ऑडियो भी साझा किया था।
उन्होंने कहा था कि वह 2022 से 2026 तक उत्पीड़न सहती रहीं, इसके बाद उन्हें कानूनी कदम उठाना पड़ा। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें देहरादून के कृष्णा मेडिकल अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। अब पुलिस गिरधारी लाल साहू को कोर्ट में पेश करेगी और जांच आगे बढ़ाएगी। हालांकि, अभी तक एफआईआर में लगाए गए आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं। यह मामला अब सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
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