मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से मिला संबल, नथुआखान की ‘कुमाऊं रोडीज’ बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
नीताल के नथुआखान में मनोज बिष्ट ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण लेकर एडवेंचर कैंप और रिजॉर्ट का विस्तार किया, जिससे उन्हें हर माह 60-70 हजार रुपये की आय हो रही है। पर्यटन कारोबार के जरिए स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार और पलायन रोकने की मिसाल पेश की गई है।

नैनीताल। पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों और पलायन की चुनौती के बीच स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को पर्यटन से जोड़कर स्वरोजगार खड़ा करने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। नैनीताल जनपद के मुक्तेश्वर क्षेत्र के नथुआखान में संचालित ‘कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप एंड रिजॉर्ट’ इसकी एक मिसाल के रूप में सामने आया है।
यहां रिजॉर्ट के संचालक मनोज बिष्ट ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने पर्यटन कारोबार को विस्तार दिया है। फलस्वरूप मनोज को सभी खर्च निकालने के बाद हर माह 60 से 70 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
उल्लेखनीय है कि नथुआखान-मुक्तेश्वर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और हिमालयी दृश्यों के लिए पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। इसी प्राकृतिक परिवेश को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ते हुए कुमाऊं रोडीज में पर्यटकों के ठहरने के लिए कमरे और टेंट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही यहां रॉक क्लाइम्बिंग, जिपलाइन, तीरंदाजी, ट्रेकिंग, जंगल भ्रमण, तारों का अवलोकन और अलाव उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
इसके फलस्वरूप राज्य सरकार के पर्यटन संबंधी अभिलेखों में भी कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप को नथुआखान में स्थित पर्यटन एवं साहसिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिष्ठान के रूप में दर्ज किया गया है।
सरकारी ऋण ने दिया व्यवसाय को विस्तार
मनोज बिष्ट के लिए सरकारी योजना का लाभ केवल ऋण प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उन्होंने पहले से चल रहे पर्यटन व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से विकसित किया। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत उन्हें उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण मिला, जिसका उपयोग कैंपिंग और साहसिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विकास में किया गया।
प्राकृतिक संपदा को बनाया कारोबार का आधार
कुमाऊं रोडीज की कहानी का महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि यहां रोजगार के लिए किसी बड़े औद्योगिक ढांचे की आवश्यकता नहीं पड़ी। क्षेत्र में पहले से मौजूद पहाड़ी वातावरण, हिमालयी दृश्य, फलदार बागान और प्राकृतिक शांति को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाया गया। उपलब्ध पर्यटक समीक्षाओं में भी परिसर के प्राकृतिक परिवेश, फलदार बागान, भोजन और अलाव जैसी सुविधाओं का उल्लेख मिलता है।
पर्यटन के क्षेत्र में ऐसे छोटे उद्यमों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इनसे पर्यटकों का खर्च केवल बड़े होटल या रिसॉर्ट तक सीमित नहीं रहता। ठहरने, भोजन, स्थानीय परिवहन, मार्गदर्शन और साहसिक गतिविधियों से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए भी आर्थिक गतिविधियों के अवसर बन सकते हैं।
योजना से मिली मदद, युवाओं के लिए संदेश
मनोज बिष्ट के अनुसार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने उन्हें अपने व्यवसाय को स्थापित करने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उनका कहना है कि स्वरोजगार ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए युवाओं से सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की है।
नथुआखान की यह कहानी इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि पहाड़ों में रोजगार की तलाश का रास्ता केवल सरकारी नौकरी या मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन तक सीमित नहीं है। यदि स्थानीय परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और बाजार की मांग को समझकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो पर्यटन भी स्थायी स्वरोजगार का माध्यम बन सकता है। सरकारी ऋण और योजनाएं ऐसे प्रयासों के लिए शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं, जबकि व्यवसाय की सफलता अंततः उद्यमी की योजना, सेवा की गुणवत्ता, पर्यटकों की मांग और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
नथुआखान में कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप का उदाहरण इसी संभावित रास्ते को सामने रखता है। मनोज का यह उद्यम पहाड़ में स्वरोजगार की संभावनाओं पर चर्चा के लिए एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य को पूरा कर रही है मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना
उत्तराखंड सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का उद्देश्य राज्य के स्थानीय युवाओं को विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना के लाभार्थियों के खातों में 33.22 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित करते हुए कहा था कि योजना स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सरकार के अनुसार योजना में राष्ट्रीयकृत, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। सेवा एवं व्यापार क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत अनुमन्य है। मनोज व उनके ‘कुमाऊं रोडीज’ की कहानी योजना की सफलता को धरातल पर बताने वाली साबित हो रही है।





