बांग्लादेश में बिगड़े हालात, शेख हसीना बोलीं- मेरी सरकार में सुरक्षित थीं महिलाएं, देश में डर का माहौल...
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने देश के हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में महिलाएं, बच्चे और अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं। हसीना ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं, मंदिरों और घरों में तोड़फोड़ हो रही है। महिलाओं की सुरक्षा भी खतरे में है। वहीं अंतरिम सरकार ने आरोपों से इनकार करते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का दावा किया है।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश में महिलाएं, बच्चे और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सुरक्षित नहीं हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है और आम लोगों में डर का माहौल है। शेख हसीना ने एक वर्चुअल संबोधन और अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद से बांग्लादेश में हिंसा, लूटपाट और प्रतिशोध की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेष रूप से हिंदू समुदाय, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
हसीना ने कहा कि कई जिलों में दुर्गा मंदिरों, घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की गई है। उनके अनुसार, अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में विफल रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह बांग्लादेश में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान दे। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों घरों पर हमले हुए हैं और कई लोग पलायन को मजबूर हुए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। पूर्व पीएम ने कहा कि जो बांग्लादेश कभी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जाना जाता था, आज वहीं महिलाएं सड़कों पर असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
कार्यस्थलों और शिक्षण संस्थानों में डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के लिए कई योजनाएं चलाई थीं, जो अब ठप पड़ती दिख रही हैं। वहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि देश में स्थिरता लाने की कोशिश की जा रही है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि कुछ घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। बांग्लादेश के हालात पर भारत भी नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय कई बार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुका है। बॉर्डर इलाकों में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं। 5 अगस्त 2024 को बड़े पैमाने पर हुए छात्र आंदोलन के बाद उन्हें पद छोड़कर देश छोड़ना पड़ा था। तब से वह लगातार अपनी पार्टी अवामी लीग के कार्यकर्ताओं से संपर्क में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का यह बयान न सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाएगा।
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