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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · शाम 4:05 · नई दिल्ली संस्करण

Shardiya Navratri 2026: 18 या 19 अक्टूबर कब है महाष्टमी? कन्फ्यूजन खत्म, जानें कन्या पूजन का मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026 में महाष्टमी की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है। पंचांग के अनुसार अष्टमी 18 अक्टूबर सुबह 08:27 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर सुबह 10:51 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार मुख्य महाष्टमी 19 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। इसी दिन व्रत, कन्या पूजन और हवन होगा। रात में पूजा करने वाले 18 अक्टूबर की रात पूजन कर सकते हैं। 19 को ही 10:51 के बाद महानवमी भी शुरू हो जाएगी।

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Shardiya Navratri 2026: 18 या 19 अक्टूबर कब है महाष्टमी? कन्फ्यूजन खत्म, जानें कन्या पूजन का मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026 को लेकर भक्तों में सबसे बड़ा सवाल महाष्टमी की तारीख को लेकर है। इस बार अष्टमी तिथि 2 दिन पड़ रही है, इसलिए 18 या 19 अक्टूबर को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार इसे साफ कर देते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है और समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी / दशहरा के साथ होगा। नवरात्रि पूरे 9 दिन की है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 08:27 बजे से होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 10:51 बजे होगा। 



सनातन धर्म में व्रत और त्योहार उदया तिथि से माने जाते हैं। यानी सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसी दिन का व्रत माना जाता है। 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि रहेगी, इसलिए मुख्य महाष्टमी का व्रत, कन्या पूजन, हवन 19 अक्टूबर सोमवार को ही किया जाएगा। हालांकि जिन परिवारों में रात में कुलदेवी, चामुंडा माता या निशिता काल में महाष्टमी की पूजा करने की परंपरा है, वे 18 अक्टूबर की रात को पूजा करेंगे, क्योंकि उस रात अष्टमी लग चुकी होगी। अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से 12:29 तक, विजय मुहूर्त: दोपहर 02:00 से 02:45 तक, गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:48 से 06:13 तक। कोशिश करें कि अष्टमी का कन्या पूजन और हवन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लें।



इस बार 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी खत्म होते ही नवमी शुरू हो जाएगी। इसलिए इसी दिन 10:51 के बाद महानवमी की पूजा भी की जा सकेगी। यानी 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है। जो लोग उदया तिथि को ज्यादा मानते हैं, वे महानवमी का पूजन 20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं, लेकिन उस दिन नवमी दोपहर 12:50 तक ही रहेगी। 11 अक्टूबर, रविवार: प्रतिपदा - घटस्थापना, मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर, सोमवार: द्वितीया - मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर, मंगलवार: तृतीया - मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर। 



बुधवार: चतुर्थी - मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर, गुरुवार: पंचमी - मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर, शुक्रवार: षष्ठी - मां कात्यायनी,17 अक्टूबर, शनिवार: सप्तमी - मां कालरात्रि,18 अक्टूबर, रविवार: अष्टमी तिथि प्रारंभ - रात्रि पूजन, 19 अक्टूबर, सोमवार: महाष्टमी और महानवमी - मुख्य कन्या पूजन, हवन, 20 अक्टूबर, मंगलवार: नवमी, विजयादशमी, दशहरा और पारण। निष्कर्ष: अगर आप व्रत और दिन में कन्या पूजन करते हैं तो 19 अक्टूबर को महाष्टमी मनाएं। रात की पूजा की परंपरा है तो 18 अक्टूबर की रात पूजा करें।

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