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बुधवार, 4 नवंबर 2026 · दोपहर 1:05 · नई दिल्ली संस्करण

पंजाब में सियासी बिसात बिछी, संगरूर रैली से राहुल गांधी ने 2027 का शंखनाद किया

राहुल गांधी ने AAP के गढ़ संगरूर को चुनकर मालवा फतह का शंखनाद किया है। पंजाब की 117 में से 69 सीटें मालवा में हैं, 2022 में AAP ने यहां 66 सीटें जीती थीं। कांग्रेस की नजर किसान, दलित और बेरोजगार युवा वोट पर है। यह रैली 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में जोश भरने और AAP सरकार की एंटी-इनकंबेंसी को भुनाने की रणनीति है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
पंजाब में सियासी बिसात बिछी, संगरूर रैली से राहुल गांधी ने 2027 का शंखनाद किया

पंजाब की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपने सबसे कमजोर किले को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है और इसके लिए चुना गया है आम आदमी पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ - संगरूर। राहुल गांधी की संगरूर में होने वाली रैली को महज एक चुनावी जनसभा के तौर पर देखना गलती होगी, इसके मायने कहीं ज्यादा गहरे हैं। पंजाब की राजनीति को समझने के लिए मालवा को समझना जरूरी है। पंजाब की 117 में से 69 विधानसभा सीटें मालवा क्षेत्र में आती हैं। जो भी पार्टी मालवा जीतती है, वही पंजाब की सत्ता पर काबिज होती है।



2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मालवा में क्लीन स्वीप किया था, 69 में से 66 सीटें जीती थीं। संगरूर तो AAP का प्रयोगशाला रहा है, मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला, यहीं से अरविंद केजरीवाल ने पंजाब फतह का मॉडल तैयार किया था। 2024 लोकसभा चुनाव में भी संगरूर सीट AAP ने जीती, हालांकि कांग्रेस ने पंजाब में 13 में से 7 सीटें जीतकर वापसी के संकेत दिए। कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि अगर मालवा में सेंध लगानी है तो AAP के दिल पर चोट करनी होगी और संगरूर से बेहतर जगह कोई नहीं।



पहला टारगेट है किसानों का भरोसा जीतना। संगरूर और पूरा मालवा किसान आंदोलन का केंद्र रहा है। राहुल गांधी लगातार MSP और किसानों के मुद्दे पर केंद्र और AAP सरकार दोनों को घेर रहे हैं। कांग्रेस को लगता है कि भगवंत मान सरकार किसानों के मुद्दे पर अपना जनाधार खो रही है। दूसरा टारगेट है दलित और पिछड़ा वोट बैंक। संगरूर, बठिंडा, मानसा बेल्ट में दलित वोट निर्णायक है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और संविधान बचाओ की नैरेटिव ने इस वर्ग में कांग्रेस के लिए नई जमीन तैयार की है। 




तीसरा और सबसे अहम टारगेट है AAP के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी को हवा देना। नशा, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था को लेकर AAP सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस इसी कमजोर नस को दबाना चाहती है। पंजाब में कांग्रेस के सामने अस्तित्व की लड़ाई है। एक तरफ बीजेपी गठबंधन की कोशिश में है, दूसरी तरफ AAP राष्ट्रीय पार्टी बनने की होड़ में कांग्रेस का स्पेस खा रही है। राहुल गांधी की यह रैली संदेश है कि कांग्रेस पंजाब को AAP के भरोसे नहीं छोड़ने वाली। 2027 विधानसभा चुनाव से डेढ़ साल पहले संगरूर में रैली करके कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरना चाहती है।



सियासी जानकारों का मानना है कि यह रैली सिर्फ जनसभा नहीं, बल्कि मालवा में कांग्रेस के 'मिशन 40' की शुरुआत है। अगर कांग्रेस मालवा में 25-30 सीटें भी निकाल लेती है तो पंजाब में सत्ता में वापसी का रास्ता खुल सकता है। साफ है, संगरूर की जमीन से राहुल गांधी ने पंजाब की सियासत में नया दांव चल दिया है। अब देखना होगा कि AAP के गढ़ में कांग्रेस की यह सेंधमारी कितनी कामयाब होती है।

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