सेकंड क्लास बनकर नहीं रहेंगे! भारत ने ठुकराया बिना वीटो का ऑफर, कहा-'अमेरिका-चीन-रूस की मनमानी...'
भारत ने UN में दो टूक कहा - बिना वीटो पावर के UNSC की स्थायी सदस्यता मंजूर नहीं। संयुक्त राष्ट्र में राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि बिना वीटो के नए स्थायी सदस्य ‘सेकंड क्लास’ बनकर रह जाएंगे, जबकि फैसले की असली ताकत P5 देशों के पास ही रहेगी। भारत ने कहा - जब तक वीटो सिस्टम है, सभी स्थायी सदस्यों को बराबर अधिकार मिलना चाहिए। दुनिया 1945 के ढर्रे पर नहीं चल सकती, सुरक्षा परिषद में तुरंत और समग्र सुधार जरूरी है।

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर भारत ने अपना सबसे सख्त और साफ रुख दिखा दिया है। भारत ने साफ कहा है कि बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता उसे मंजूर नहीं है। अगर ऐसा होता है तो नए स्थायी सदस्य सिर्फ नाम के स्थायी होंगे, फैसले की असली ताकत आज के 5 देशों (P5) के पास ही रहेगी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने सोमवार को UNGA में अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की पूर्ण बैठक में ‘वीटो के सवाल’ पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा - "जब तक वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक सुधार के बाद बनी सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए।"
हरीश ने कहा कि बिना वीटो के नए स्थायी सदस्यों की एक अलग श्रेणी बनाना उन्हें ‘सेकंड क्लास’ या ‘दूसरे दर्जे’ का सदस्य बना देगा। इससे P5 के फैसले लेने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आएगा और सुधार का मकसद ही फेल हो जाएगा। हरीश ने वीटो के दुरुपयोग पर भी P5 को घेरा। उन्होंने कहा, "वीटो एक जिम्मेदारी है, न कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ साधने का साधन।" उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा कि P5 में से दो देशों ने साढ़े तीन दशक से वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है, जबकि ज्यादातर वीटो या वीटो की धमकियां सिर्फ तीन देशों की तरफ से आई हैं। मौजूदा P5 हैं - अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस। इनके पास किसी भी प्रस्ताव को रोकने की ताकत है।
भारत ने कहा कि दुनिया अब 1945 की परिस्थितियों में नहीं जी रही है। 1945 में बनी UNSC की संरचना आज की भू-राजनीतिक हकीकत को नहीं दिखाती। इसलिए 2022 की ‘वीटो पहल’ (UNGA प्रस्ताव 76/262) के बावजूद बड़ी संख्या में वीटो का इस्तेमाल चिंता का विषय है। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सिर्फ अस्थायी सीटें बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। भारत स्थायी और अस्थायी दोनों कैटेगरी में विस्तार चाहता है। हरीश ने कहा कि पांचों क्लस्टर - सदस्यता की श्रेणी, वीटो का सवाल, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, परिषद का आकार और कामकाज के तरीके - पर एक साथ सुधार जरूरी है। टुकड़ों में सुधार विफल हो जाएंगे।
गौरतलब है कि भारत लंबे समय से UNSC की स्थायी सदस्यता का दावेदार है और G4 समूह (भारत, जर्मनी, जापान, ब्राजील) के साथ मिलकर सुधार की मांग कर रहा है। भारत ने 8 बार अस्थायी सदस्य के तौर पर काम किया है और अब 2028-29 कार्यकाल के लिए फिर अस्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ेगा, जहां उसका मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। चुनाव जून 2027 में होंगे। भारत का संदेश साफ है - बराबरी चाहिए तो पूरा अधिकार दो, आधा-अधूरा स्टेटस नहीं चलेगा।




