मोदी सरकार का महिला सुरक्षा पर बड़ा फैसला: POCSO और रेप केसों में नहीं होगी देरी, बढ़ाईं 850 विशेष अदालतें...
मोदी कैबिनेट ने रेप और POCSO केसों के लिए 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों को मंजूरी दी। योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक 5 साल के लिए बढ़ाई गई। कुल बजट 3788 करोड़ रुपये है, जिसमें 2353 करोड़ केंद्र देगा, वो भी निर्भया फंड से। अभी 779 कोर्ट काम कर रही हैं, अब 71 नई जुड़ेंगी। ये कोर्ट उन जिलों में बनेंगी जहां सबसे ज्यादा केस पेंडिंग हैं, ताकि पीड़ितों को तेज न्याय मिले।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्ती दिखाते हुए मोदी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने देश भर में 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (Fast Track Special Courts) को जारी रखने और उनके विस्तार को मंजूरी दे दी है। ये अदालतें खासतौर पर रेप और बच्चों के यौन शोषण (POCSO) के मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए हैं। बुधवार 4 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामलों को सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।
कैबिनेट ने इस सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम को 5 साल के लिए और बढ़ा दिया है। यह योजना अब 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी। इसके लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये होगा और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश 1,434.89 करोड़ रुपये देंगे। केंद्र का पूरा खर्च निर्भया फंड से दिया जाएगा। इस योजना को न्याय विभाग, राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू करेगा। अभी देश में 779 फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रही थीं। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 850 कर दी जाएगी। मतलब 71 नई अदालतें और जुड़ेंगी। नई अदालतें उन जिलों में बनाई जाएंगी जहां रेप और POCSO के सबसे ज्यादा केस पेंडिंग हैं। केस पेंडेंसी के डेटा के आधार पर जिलों का चयन होगा।
यह योजना पहली बार अक्टूबर 2019 में शुरू हुई थी। उस समय क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2018 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे लॉन्च किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2019 को कहा था कि जिन जिलों में POCSO के 100 से ज्यादा केस पेंडिंग हैं, वहां विशेष अदालतें बनाई जाएं। इन अदालतों का मकसद है कि रेप और POCSO जैसे संवेदनशील मामलों का ट्रायल तय समय में पूरा हो और पीड़ितों को जल्दी न्याय मिले। देश में ऐसे मामलों की पेंडेंसी लगातार बड़ी चिंता बनी हुई है।
इसी बैठक में कैबिनेट ने 14,500 करोड़ रुपये की एनर्जी स्टोरेज योजना, 2,814 करोड़ रुपये की क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना और 4,371 करोड़ रुपये की VISTAR (सांख्यिकी सुधार) योजना को भी मंजूरी दी। फास्ट ट्रैक कोर्टों का विस्तार न्यायिक सुधारों की दिशा में सबसे अहम कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ केसों का तेजी से निपटारा होगा, बल्कि महिलाओं और बच्चों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।
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