भारत आने से पहले अमेरिका ने दिया बड़ा तोहफा, रुबियो बोले- बहुत करीब है...
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत आने से पहले बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील साइन होने के बेहद करीब है। रुबियो मंगलवार को मुंबई पहुंचेंगे और जामनगर रिफाइनरी जाएंगे। उन्होंने कहा कि रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट ग्लोबल सप्लाई को देखते हुए दी गई। भारत-अमेरिका डील की पहली किस्त फाइनल हो चुकी है, कानूनी ड्राफ्टिंग बाकी है। फरवरी में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% किया था।

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत आने से ठीक एक दिन पहले बड़ा ऐलान किया है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ ट्रेड डील को फाइनल करने के बेहद करीब है।रुबियो इस समय मध्य एशिया के दौरे पर हैं। उज्बेकिस्तान के समरकंद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "We are trying to finalise a trade deal with India right now. We are very close to doing that." यानी हम अभी भारत के साथ ट्रेड डील को फाइनल करने की कोशिश कर रहे हैं, और हम इसे करने के बेहद करीब हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार, 21 अक्टूबर को भारत के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे। वह सबसे पहले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचेंगे। इसके बाद वह गुजरात के जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट ऑयल रिफाइनरी का भी दौरा करेंगे। दिल्ली में वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। रुबियो ने इस दौरान रूसी तेल और गैस पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भी अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पिछले कुछ महीनों में प्रतिबंधों में छूट (waiver) देनी पड़ी है, क्योंकि इसका असर ग्लोबल सप्लाई और कीमतों पर पड़ रहा था। उन्होंने कहा, "हर देश के पास विचार करने के लिए जटिल कारकों का एक सेट होता है।
भूगोल वास्तविक है। कुछ देशों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति बनाते समय इन सबको संतुलित करना पड़ता है।" रुबियो ने साफ किया कि जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा छूट जैसे फैसले लेते हैं, तो ट्रेड डील जैसे द्विपक्षीय संबंधों को भी ध्यान में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की विदेश नीति सिर्फ रूस-यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित नहीं है, बल्कि उसे दूसरे देशों के साथ संबंधों और उनकी आर्थिक वास्तविकताओं को भी देखना पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और अमेरिका पहले चरण के व्यापार समझौते को सील करने के करीब हैं। इस डील का मूल फॉर्मूला है - भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ में कमी के बदले भारत में अमेरिकी उत्पादों के लिए अधिक पहुंच।
फरवरी में घोषित फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया था और रूसी तेल खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25% शुल्क भी हटा दिया था। पिछले हफ्ते वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि ट्रेड डील की पहली किस्त फाइनल हो चुकी है और अब कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है। सबसे बड़ी अड़चन डेयरी सेक्टर को लेकर बनी हुई है, जहां अमेरिका भारत में अधिक पहुंच चाहता है। इसके अलावा अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा था कि डील बहुत करीब है और होकर रहेगी। रुबियो के इस दौरे से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर औपचारिक मुहर लग सकती है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
विषय




