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गुरुवार, 5 नवंबर 2026 · शाम 5:10 · नई दिल्ली संस्करण

अकेले लड़ेगी बसपा, 150 सीटों पर फोकस - मायावती ने तैयार किया त्रिकोणीय मुकाबले का प्लान

मायावती ने बसपा को 2027 में त्रिकोणीय मुकाबले में उतारने के लिए 3 फॉर्मूलों पर काम शुरू किया है। पहला, बूथ और कैडर को मजबूत करना। दूसरा, 150 सीटों पर उम्मीदवारों का जल्दी चयन कर उन्हें लंबा समय देना। तीसरा, 2007 वाला सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला, जिसमें दलितों के साथ ब्राह्मण, मुस्लिम, ओबीसी और सवर्णों को जोड़ना है। बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी। आकाश आनंद उम्मीदवार चयन और युवा जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
अकेले लड़ेगी बसपा, 150 सीटों पर फोकस - मायावती ने तैयार किया त्रिकोणीय मुकाबले का प्लान

लखनऊ। लखनऊ। उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव 2027 बसपा प्रमुख मायावती के लिए अपने सियासी वजूद को बचाए रखने की लड़ाई है। पिछले कई चुनावों से बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच सिमटते मुकाबले को मायावती अब त्रिकोणीय बनाना चाहती हैं। इसी मकसद से उन्होंने लखनऊ के 12 मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों, मंडल समन्वयकों और सभी स्तर के पदाधिकारियों की बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक में मिशन-2027 को फतह करने के लिए 3 फॉर्मूलों पर मंथन हो रहा है। बैठक में मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी मौजूद हैं। बसपा ने साफ कर दिया है कि वह 2027 का चुनाव अकेले लड़ेगी। किसी भी दल से गठबंधन नहीं होगा।



मायावती का पहला फॉर्मूला संगठन को जमीनी स्तर पर चुस्त-दुरुस्त करना है। बसपा कभी अपने कैडर की वजह से ही जानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह कैडर कमजोर पड़ गया। अब मायावती ने हर बूथ पर कार्यकर्ता को सक्रिय करने, कैडर कैंप चलाने और जिलाध्यक्षों से रोज की रिपोर्ट लेने का निर्देश दिया है। बैठक में पहले दिए गए दिशा-निर्देशों पर कितना काम हुआ, इसकी समीक्षा भी की जा रही है। मायावती का मानना है कि जब तक संगठन बूथ तक मजबूत नहीं होगा, तब तक चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला नहीं बन पाएगा। 



दूसरा फॉर्मूला है उम्मीदवारों का जल्दी चयन। बसपा ने इस बार अलग रणनीति अपनाई है। आकाश आनंद और मंडल कोऑर्डिनेटर अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर रहे हैं। पार्टी करीब 150 सीटों पर विशेष फोकस कर रही है, जहां बसपा का पारंपरिक वोटबैंक मजबूत है। इन सीटों पर उम्मीदवारों को पहले से तय करके उन्हें लंबा समय दिया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर सकें। मायावती का मानना है कि आखिरी समय में टिकट देने से प्रत्याशी हार जाता है। जल्दी उम्मीदवार उतारने से ही सपा और बीजेपी को टक्कर दी जा सकती है।



तीसरा और सबसे अहम फॉर्मूला है 2007 वाला सोशल इंजीनियरिंग। 2007 में बसपा ने 403 में से 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। तब मायावती ने दलितों के साथ ब्राह्मण, मुस्लिम, ओबीसी और सवर्णों को जोड़कर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का नारा दिया था। अब 2027 में भी मायावती उसी फॉर्मूले को दोहराना चाहती हैं। दलित वोटबैंक को बचाने के साथ-साथ ब्राह्मणों, अति-पिछड़ों और मुसलमानों को भी साधने की कोशिश हो रही है। पार्टी की रणनीति है कि हर जाति-वर्ग का उम्मीदवार उतारकर सभी को प्रतिनिधित्व दिया जाए।



इस पूरी रणनीति में आकाश आनंद की भूमिका सबसे अहम है। वे अब सिर्फ रैली में भाषण देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उम्मीदवारों की घोषणा, युवाओं को जोड़ने और संगठन को सक्रिय करने का काम भी कर रहे हैं। दलित युवाओं को भीम आर्मी और चंद्रशेखर आजाद की तरफ जाने से रोकने के लिए आकाश को आगे किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के मंच से 6 दिसंबर को लखनऊ में विशाल जनसभा का ऐलान भी हो सकता है। इसके जरिए मायावती अपनी ताकत दिखाना चाहती हैं।



2022 में बसपा को सिर्फ 1 सीट मिली थी, लेकिन वोट प्रतिशत करीब 13% था। मायावती को भरोसा है कि अगर ये 3 फॉर्मूले जमीन पर उतर गए, तो बसपा फिर से त्रिकोणीय मुकाबले में आ जाएगी और बीजेपी-सपा दोनों की टेंशन बढ़ जाएगी।

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