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बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · दोपहर 3:53 · नई दिल्ली संस्करण

PM Ambani वाले तंज पर सुनील मित्तल का झन्नाटेदार जवाब, मस्क की बोलती बंद

एलॉन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की देरी के लिए मुकेश अंबानी और मोदी सरकार पर मोनोपॉली का आरोप लगाया, राहुल गांधी ने समर्थन किया। अब एयरटेल चेयरमैन सुनील मित्तल ने करारा जवाब दिया है। मित्तल ने कहा - "मैं खुद 5 साल से कतार में हूं, मेरे सैटेलाइट 5 साल से भारत के ऊपर हैं, ग्राउंड नेटवर्क 3 साल से तैयार है, फिर भी परमिशन नहीं मिली।" सरकार ने भी साफ किया कि स्टारलिंक, वनवेब और जियो तीनों एक ही स्टेज पर हैं।

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PM Ambani वाले तंज पर सुनील मित्तल का झन्नाटेदार जवाब, मस्क की बोलती बंद

भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी को लेकर एलॉन मस्क ने पिछले हफ्ते बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया था। मस्क ने X पर लगातार पोस्ट करके आरोप लगाया कि भारत के कुछ "ऑलिगार्क" अपनी मोनोपॉली बचाने के लिए स्टारलिंक को रोक रहे हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया - "क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?" और मुकेश अंबानी को तंज कसते हुए "Prime Minister Ambani" तक कह डाला। मस्क के इस बयान पर सियासत भी गरमा गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मस्क की बात का समर्थन करते हुए लिखा, "Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy" - जिससे साफ था कि वह केंद्र की मोदी सरकार और बड़े उद्योगपतियों के गठजोड़ पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल के इस ट्वीट के बाद मस्क ने उनका धन्यवाद भी किया।



लेकिन अब इस पूरे विवाद पर भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने ऐसा जवाब दिया है, जिसने मस्क के सारे दावों की पोल खोल दी है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस और बाद में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मित्तल ने दो टूक कहा - "हम भी अपने अप्रूवल का इंतजार कर रहे हैं।" मित्तल ने बताया कि उनकी कंपनी Eutelsat OneWeb भी उसी लाइन में खड़ी है, जिसमें स्टारलिंक है। मित्तल ने कहा, "मैं कतार में उनसे काफी आगे हूं। मैंने 5 साल पहले आवेदन किया था। मेरा ग्राउंड नेटवर्क पिछले 3 साल से तैयार है। मेरे सैटेलाइट पिछले 5 साल से भारत के ऊपर मंडरा रहे हैं। हमें भी अभी तक परमिशन नहीं मिली है। तो हमें बहुत खुशी होगी अगर हमें उनसे कुछ दिन पहले भी परमिशन मिल जाए।"



मित्तल के इस बयान से तीन बातें साफ हो गईं। पहली - यह कोई अंबानी बनाम मस्क की लड़ाई नहीं है। भारत सरकार ने तीनों कंपनियों - स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और वनवेब को लाइसेंस दिया है, लेकिन तीनों ही अभी सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट का इंतजार कर रही हैं। सरकार ने भी साफ कहा है कि प्रक्रिया पूरी तरह से फेयर और नॉन-डिस्क्रिमिनेटरी है। दूसरी - अगर मोदी सरकार किसी एक उद्योगपति को फायदा पहुंचा रही होती, तो सुनील मित्तल जैसे बड़े उद्योगपति को 5 साल तक क्यों इंतजार करना पड़ता? मित्तल खुद इस बात के गवाह हैं कि नियम सबके लिए एक जैसे हैं। तीसरी - मस्क का यह कहना कि उन्होंने भारत के सारे कानून मान लिए हैं, इसलिए उन्हें तुरंत लाइसेंस मिलना चाहिए, तकनीकी रूप से अधूरा है। सैटकॉम सर्विस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। 



गृह मंत्रालय की सुरक्षा जांच अनिवार्य है, ताकि कोई भी विदेशी कंपनी भारतीय गेटवे को बायपास न कर सके। दरअसल, जियो का सैटेलाइट वेंचर भी अभी उसी स्टेज पर है, जिस पर स्टारलिंक है। ऐसे में मस्क का "मोनोपॉली" वाला आरोप तथ्यों पर टिकता ही नहीं। सुनील मित्तल के इस करारे जवाब के बाद अब यह साफ है कि स्टारलिंक की देरी के पीछे कोई राजनीतिक या कॉर्पोरेट साजिश नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसका पालन मस्क को भी करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय कंपनियां कर रही हैं।

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