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बुधवार, 4 नवंबर 2026 · शाम 6:13 · नई दिल्ली संस्करण

गडकरी और CM सम्राट में बड़ी डील: बिहार की गाद प्रबंधन नीति से बाढ़ और सड़क दोनों का समाधान...

बिहार में बाढ़ से बचाव के लिए सरकार ने नया प्लान बनाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नितिन गडकरी के बीच MoU हुआ, जिसके तहत नदियों की गाद से सड़कें बनेंगी।‘ नदी संजीवनी’ और गाद प्रबंधन नीति 2026 के तहत नदियों से वैज्ञानिक तरीके से सिल्ट निकाली जाएगी। इससे नदियां गहरी होंगी और बाढ़ कम आएगी। पहले चरण में 16 हाईवे प्रोजेक्ट में 243 लाख घन मीटर गाद का इस्तेमाल होगा।

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
गडकरी और CM सम्राट में बड़ी डील: बिहार की गाद प्रबंधन नीति से बाढ़ और सड़क दोनों का समाधान...

बिहार में हर साल बाढ़ से तबाही मचाने वाली नदियों की गाद अब वरदान बनेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत बड़ा फैसला लिया है। अब नदियों, बैराजों और जलाशयों से निकाली गई गाद से राज्य में सड़कें बनेंगी। इसको लेकर मंगलवार, 3 नवंबर को नई दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच ऐतिहासिक MoU पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद मौजूद रहे।



सरकार ने 17 सितंबर 2026 को बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 लागू की थी। इस नीति को लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। इसका नारा है – ‘गहरी नदियां, मजबूत सड़कें और समृद्ध बिहार’। इस नीति के तहत नदियों में जमा 10 मीटर तक की गाद को वैज्ञानिक तरीके से निकाला जाएगा। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, नदियों की जलधारण और जलप्रवाह क्षमता बढ़ेगी, जिससे बाढ़ का खतरा कम होगा। दूसरा, निकाली गई मिट्टी और सिल्ट का इस्तेमाल सड़क निर्माण में होगा।



समझौते के मुताबिक, पहले चरण में 16 चालू राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 243 लाख घन मीटर गाद का मुफ्त इस्तेमाल होगा। भविष्य की 27 नई परियोजनाओं में 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। कुल 43 परियोजनाओं में 1,078 लाख घन मीटर गाद का उपयोग होगा। अभी बिहार में NHAI की 39 परियोजनाएं (1,561 किमी) 58,340 करोड़ रुपये की लागत से बन रही हैं। वहीं 1,85,200 करोड़ की 11 नई परियोजनाएं (1,982 किमी) प्रस्तावित हैं। NHAI जहां-जहां गाद मांगेगा, राज्य सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस देने में मदद करेगी। गाद निकालने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच होगी।



नितिन गडकरी ने कहा कि यह काम महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर होगा। उन्होंने कहा कि यह मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बनेगा। सम्राट चौधरी ने कहा कि इससे उपजाऊ खेतों की ऊपरी मिट्टी खोदने की जरूरत खत्म होगी और नदी इकोसिस्टम में सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि गाद निकालने से करीब एक लाख एकड़ नई जमीन भी मिल सकती है, जिसका उपयोग 12 नई टाउनशिप, 10 नए एयरपोर्ट और 32 मेडिकल कॉलेजों के लिए हो सकता है। फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद की समस्या सबसे गंभीर है। गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, महानंदा, सोन और पुनपुन जैसी नदियों से गाद निकालने पर फोकस होगा। इस पूरी प्रक्रिया का नोडल विभाग सड़क निर्माण विभाग होगा।


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