15 दिन बाद आया फैसला: दो पैन कार्ड केस में आजम खान-अब्दुल्ला को जमानत, लेकिन दोष...
समाजवादी नेता आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने दोनों की जमानत मंजूर कर सजा निलंबित कर दी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक से इनकार कर दिया। आरोप है कि अब्दुल्ला ने चुनाव के लिए गलत जन्मतिथि वाला पैन कार्ड बनवाया। निचली अदालत ने आजम को 10 साल और अब्दुल्ला को 7 साल की सजा सुनाई थी। रिहाई अन्य मामलों पर निर्भर करेगी।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है और सजा को निलंबित कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने दोषसिद्धि (कन्विक्शन) पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी है। जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। दोनों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिसमें दोषसिद्धि पर रोक, सजा निलंबन और अंतरिम जमानत पर रिहाई की मांग की गई थी। इस मामले में 15 अक्टूबर को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जो आज 29 अक्टूबर को सुनाया गया।
यह मामला 2019 का है। आरोप है कि अब्दुल्ला आजम खान ने 2017 में स्वार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए अपनी उम्र को गलत दिखाया। उनकी असली जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 बताई जाती है, जबकि चुनाव लड़ने के लिए 30 सितंबर 1990 दिखाई गई। इसके लिए फर्जी पैन कार्ड बनवाया गया और नामांकन पत्र में गलत जन्मतिथि का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि आजम खान ने बेटे को चुनाव लड़ने योग्य बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।
रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में नवंबर 2024 में आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी। बाद में सेशन कोर्ट में अपील होने पर आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई, जबकि अब्दुल्ला की 7 साल की सजा बरकरार रखी गई और जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट में आजम खान और अब्दुल्ला की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एन.आई. जाफरी और शाश्वत आनंद ने दलीलें पेश कीं।
वहीं शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना की ओर से अधिवक्ता शरद शर्मा और नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां की ओर से अधिवक्ता विजय विक्रम सिंह ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से भी सजा बढ़ाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने और सजा सस्पेंड होने के बावजूद आजम खान और अब्दुल्ला की जेल से रिहाई अन्य मामलों पर निर्भर करेगी। जानकारी के मुताबिक दोनों के खिलाफ दो अन्य मामले भी लंबित हैं। अगर उन मामलों में बी-वारंट या अन्य कोई कानूनी अड़चन नहीं है तो ही रिहाई संभव हो पाएगी।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही 28 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी 426 करोड़ की संपत्ति अटैच की थी, जिसकी बाजार कीमत 1170 करोड़ आंकी गई है। ED का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन और सामग्री का दुरुपयोग हुआ है। इस फैसले से आजम परिवार को कानूनी तौर पर बड़ी राहत तो मिली है, लेकिन उनका सियासी और कानूनी संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। दोषसिद्धि पर रोक न लगने से अब्दुल्ला के चुनाव लड़ने पर अभी भी रोक जारी रहेगी।




