यूपी में ओवैसी का बड़ा दांव! मदरसों में पैठ के लिए मुफ्ती ओसामा नदवी को सौंपी कमान
यूपी में पैठ बनाने के लिए असदुद्दीन ओवैसी ने नया प्लान बनाया है और मदरसा-उलेमा नेटवर्क की कमान मुफ्ती ओसामा नदवी को सौंपी है। खतौली निवासी ओसामा पहले मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष थे, अब प्रदेश संगठन संभालेंगे। शौकत अली (अशराफ) और ओसामा (पसमांदा) की जोड़ी से अशराफ-पसमांदा समीकरण साधने की कोशिश है। मदरसा सर्वे के मुद्दे पर खुद को मुस्लिम अधिकारों का पैरोकार बताकर AIMIM 2027 विधानसभा की जमीन तैयार करना चाहती है।

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में पार्टी के विस्तार के लिए नई रणनीति तैयार की है, जिसके तहत उलेमा और मदरसों के नेटवर्क तक पहुंच बनाने पर फोकस किया गया है। इस मिशन की कमान मुफ्ती ओसामा नदवी को सौंपी गई है। मुफ्ती ओसामा नदवी मूल रूप से मुजफ्फरनगर के खतौली के रहने वाले हैं। पार्टी ने पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के बीच संतुलन बनाने के लिए उन पर भरोसा जताया है। ओसामा इससे पहले AIMIM मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और अब उन्हें प्रदेश संगठन का जिम्मा दिया गया है। राजनीतिक रूप से इसे अशराफ और पसमांदा मुस्लिमों के बीच सियासी केमिस्ट्री बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अशराफ समुदाय से आते हैं, जबकि मुफ्ती ओसामा पसमांदा समुदाय से हैं। दोनों की जोड़ी लंबे समय से साथ काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक पर परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस का प्रभाव रहा है। AIMIM इस समीकरण को चुनौती देना चाहती है। पार्टी का लगातार यह आरोप रहा है कि सेक्युलर पार्टियां मुसलमानों का सिर्फ वोट लेती हैं, लेकिन स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं देतीं। पिछले कुछ वर्षों में यूपी में मदरसों के सर्वे, वक्फ सुधार और नियमों में बदलाव को लेकर जो माहौल बना है, उसमें AIMIM खुद को उलेमाओं के अधिकारों के पैरोकार के तौर पर पेश करना चाहती है। ओवैसी ने पहले यूपी सरकार के गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को "मिनी NRC" बताते हुए कहा था कि यह संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत मिले अधिकारों में हस्तक्षेप है।
पार्टी का मानना है कि मदरसों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल कर कैडर को मजबूत किया जा सकता है और चुनावी जमीन तैयार की जा सकती है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर ओवैसी पहले ही लोगों से AIMIM को मजबूत करने की अपील कर चुके हैं। हैदराबाद में एक जनसभा में उन्होंने कहा था कि जब हर समुदाय का अपना नेतृत्व हो सकता है, तो मुसलमानों का क्यों नहीं। बिहार में 5 सीटें जीतने के बाद पार्टी यूपी में भी इसी मॉडल को दोहराना चाहती है। इस नई रणनीति से सपा सहित मुख्य विपक्षी दलों के खेमे में हलचल तेज हो सकती है। अगर AIMIM उलेमा और मदरसों के जरिए मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग को अपने साथ जोड़ने में सफल होती है, तो इसका सीधा असर वोटों के ध्रुवीकरण और 2027 के नतीजों पर पड़ेगा। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि मुफ्ती ओसामा नदवी ओवैसी की इस उम्मीद पर कितना खरे उतरते हैं।




