वोटर लिस्ट में 'राम ने यादव को मारा' पर बवाल, विवादित पोस्ट पर झुका चुनाव आयोग, मांगी माफी
यूपी CEO के X हैंडल से मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ नाम की गड़बड़ी पर किया गया पोस्ट बवाल बन गया। दरअसल, Ramhit Yadav का अनुवाद सॉफ्टवेयर ने ‘राम ने यादव को मारा’ कर दिया था, जिस पर AAP सांसद संजय सिंह ने जातिवाद का आरोप लगाया। जवाब में CEO ने लिखा था - "शुक्र है राम ने अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना सांप्रदायिक होने का इल्जाम लगता"। भाषा पर बवाल मचा तो ECI के निर्देश के बाद CEO ऑफिस को 24 घंटे में माफी मांगनी पड़ी।

लखनऊ। यूपी में विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के चुनाव की वोटर लिस्ट में अजीबोगरीब नामों को लेकर बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है। ‘रामहित यादव’ का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ लिखे जाने पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाए तो यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा के आधिकारिक X हैंडल से ऐसा जवाब आया, जिसने विवाद को और भड़का दिया। तीखी आलोचना के बाद अब 24 घंटे के अंदर CEO ऑफिस को माफी मांगनी पड़ी है। दरअसल, पूरा मामला मतदाता सूची के हिंदी अनुवाद में हुई गड़बड़ी का है। CEO कार्यालय के मुताबिक सॉफ्टवेयर को अंग्रेजी में दर्ज नामों का हिंदी में लिप्यंतरण करना था, लेकिन उसने कई जगह अनुवाद कर दिया।
इसी वजह से ‘Ramhit Yadav’ का मतलब बदलकर ‘राम ने यादव को मारा’ हो गया। ऐसी ही एक पर्ची प्रयागराज-झांसी खंड स्नातक सीट के चुनाव में सामने आई, जहां वोटर रवि शर्मा के पिता के नाम की जगह ‘राम ने शर्मा को मारा’ लिख दिया गया। AAP सांसद संजय सिंह ने राजेश यादव नाम के वोटर की पर्ची का वीडियो शेयर करते हुए चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार से सवाल किया - "राम ने यादव को ही क्यों मारा? राम ने किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय या बिष्ट को क्यों नहीं मारा? क्या आपका कंप्यूटर जातिवादी है या आप किसी पार्टी का एजेंडा चला रहे हैं?" संजय सिंह ने यह भी कहा कि लिस्ट में ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ जैसे नाम भी मिले हैं, जो पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हैं।
संजय सिंह के सवाल पर CEO यूपी के X हैंडल से जवाब आया कि "हालिया विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में एक अजीबोगरीब नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ भी है। कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते। गलती स्वीकार है, लेकिन हमारे सौभाग्य से गलती होते समय भी जाति का भेदभाव नहीं हुआ।" इसके बाद सबसे विवादित लाइन लिखी गई - "भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्जाम भी लगता।" इस भाषा पर सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि "इस हैंडल को कौन चला रहा है, पता नहीं। वैसे भी कोई खास विश्वसनीयता बची नहीं है।" संजय सिंह ने इसे सांप्रदायिक मानसिकता और बीजेपी के एजेंट जैसा व्यवहार बताया।
मामला तूल पकड़ने पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को हस्तक्षेप करना पड़ा। ECI ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि संयमित भाषा का प्रयोग करें और बिना अनावश्यक टिप्पणी के केवल तथ्यों तक बात सीमित रखें। इसके बाद आज MLC चुनाव की मतगणना के दिन CEO यूपी के हैंडल से माफीनामा जारी किया गया। पोस्ट में लिखा गया - "इस हैंडल के उद्धृत पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा के स्तर और भाव और इनकी तीखी प्रकृति इस आधिकारिक हैंडल से अपेक्षित संचार की प्रकृति के अनुरूप नहीं है। पोस्ट से उत्पन्न वास्तविक आक्रोश को नोट किया गया है। हम इससे अचंभित और नाराज लोगों से ईमानदारी से माफी मांगते हैं। अब से हमारा संचार शालीन और औपचारिक होगा।"
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