MLC चुनाव में बगावत पड़ी भारी! बाहुबली अनंत सिंह की बढ़ी मुश्किलें, विधानसभा सचिवालय ने भेजा कारण बताओ नोटिस
मोकामा विधायक अनंत सिंह को बिहार विधानसभा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों पर नोटिस जारी किया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर सचिव संजय कुमार सिंह ने नोटिस भेजा, 7 दिन में जवाब देना होगा।जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। आरोप है कि विधान परिषद चुनाव में अनंत ने जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार की जगह जन सुराज के अनुज सिंह का समर्थन किया। जेडीयू ने 24 अक्टूबर को उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

पटना: बिहार की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की विधायकी पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। बिहार विधानसभा सचिवालय ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर विधानसभा सचिव संजय कुमार सिंह ने यह नोटिस जारी किया है। अनंत सिंह को 7 दिन के अंदर अपना जवाब देना होगा। सोमवार को अनंत सिंह ने विधानसभा का नोटिस प्राप्त कर लिया है।
दरअसल, इस पूरे मामले की शिकायत जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की ओर से की गई थी। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को लिखित आवेदन देकर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। आवेदन में आरोप लगाया गया था कि अनंत सिंह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया है। जेडीयू ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को कई पुख्ता सबूत भी सौंपे हैं। इनमें अखबारों की कटिंग, सीडी और वीडियो फुटेज सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं। इन सबूतों की जांच के बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
पूरा विवाद बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव से जुड़ा है। इस सीट पर जेडीयू ने अपने वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। वहीं, जन सुराज पार्टी की ओर से अनुज सिंह मैदान में थे। आरोप है कि मोकामा विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने न सिर्फ उनके पक्ष में प्रचार किया, बल्कि वोट भी मांगे। जेडीयू ने इसे पार्टी के निर्देशों की सीधी अवहेलना माना।
जेडीयू का कहना है कि अनंत सिंह ने वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का भी इस्तेमाल किया। हालांकि अनंत सिंह ने सफाई में कहा था कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ काम नहीं किया, बल्कि नीरज कुमार से व्यक्तिगत नाराजगी के कारण उनका विरोध किया था। इससे पहले 24 अक्टूबर 2026 को जेडीयू ने कड़ा कदम उठाते हुए अनंत सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उनकी प्राथमिक सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई थी। उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से निकाला गया था।
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिस में 7 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने खुद मीडिया से कहा है कि जेडीयू की ओर से आवेदन और सबूत मिले हैं, लेकिन नियमानुसार दोनों पक्षों को सुना जाना जरूरी है। अनंत सिंह के जवाब मिलने के बाद उनके जवाब और जेडीयू द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही विधानसभा सदस्यता पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अगर वह जवाब नहीं देते हैं तो उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एकतरफा फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल अनंत सिंह की विधायकी बरकरार है, लेकिन कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर उनकी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। एक तरफ सदस्यता पर तलवार लटकी है तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव मर्डर केस में उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है।
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