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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · दोपहर 3:13 · नई दिल्ली संस्करण

CM योगी का सनसनीखेज दावा - यूपी में एक करोड़ हिंदुओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब...

लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा दावा किया है कि यूपी में एक करोड़ हिंदू वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। उन्होंने इसे सोची-समझी साजिश बताते हुए गहरी चिंता जताई। योगी ने कहा कि यह तुष्टिकरण की राजनीति है और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए। वहीं विपक्ष ने इस दावे को बेबुनियाद बताकर पलटवार किया है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
CM योगी का सनसनीखेज दावा - यूपी में एक करोड़ हिंदुओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि प्रदेश में एक करोड़ हिंदू वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। सीएम योगी ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है। उनका यह बयान अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जब प्रदेश में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत हिंदू बहुल इलाकों में वोटरों के नाम काटे गए। सीएम ने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं है, बल्कि वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है।



योगी ने कहा, "एक करोड़ हिंदुओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं। यह बहुत गंभीर मामला है। अगर एक-एक वोटर का नाम काटा जाएगा तो लोकतंत्र कैसे मजबूत होगा? यह उन लोगों की साजिश है जो तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस मामले की गहन जांच की जाए और हर पात्र व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जाए। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया जाता है। इस अभियान के तहत मृत, डुप्लीकेट और स्थानांतरित वोटरों के नाम हटाए जाते हैं और नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में करीब एक करोड़ नाम हटाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि ये नाम मृत या डुप्लीकेट थे, लेकिन सीएम योगी ने इस दलील पर सवाल उठाया है।



मुख्यमंत्री का कहना है कि जिन इलाकों से नाम हटाए गए हैं, वहां हिंदू वोटरों की संख्या ज्यादा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह सब वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने और एक विशेष समुदाय को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे घर-घर जाकर जांच करें कि किसका नाम कटा है और उन्हें फिर से जोड़ने में मदद करें। सीएम योगी के इस बयान पर विपक्ष ने पलटवार किया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कहा कि मुख्यमंत्री बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। सपा प्रवक्ता ने कहा कि वोटर लिस्ट चुनाव आयोग बनाता है, सरकार नहीं। अगर नाम कटे हैं तो इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है, न कि कोई पार्टी। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी खुद वोटर लिस्ट में गड़बड़ी कराकर फायदा लेना चाहती है।



हालांकि, भाजपा नेताओं ने सीएम योगी के दावे का समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि पिछले कई सालों से कुछ जिलों में वोटर लिस्ट में हेरफेर की शिकायतें मिल रही थीं। अब जब आंकड़े सामने आए हैं तो सच्चाई सबके सामने है। फिलहाल, इस मामले ने यूपी की सियासत को गरमा दिया है। चुनाव आयोग ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही आयोग इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

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