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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:40 · नई दिल्ली संस्करण

उत्तराखंड का युवा नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि देने वाला बने : सीएम धामी

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
उत्तराखंड का युवा नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि देने वाला बने : सीएम धामी

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 3848 लाभार्थियों के बैंक खातों में 33.22 करोड़ रुपए की धनराशि का सीएम आवास से ऑनलाइन माध्यम से वितरण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड का युवा नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना राज्य की उन प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसने वास्तविक रूप से पलायन को रोकने, रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सीएम धामी ने कहा कि कोविड-19 के दौरान लौटे प्रवासी, युवा उद्यमी, कारीगर, हस्तशिल्पी एवं शिक्षित बेरोजगार इस योजना के प्रमुख लाभार्थी हैं। योजना के अंतर्गत राज्य के मूल और स्थायी निवासियों को विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में राष्ट्रीयकृत, सहकारी एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विनिर्माण इकाइयों के लिए 25 लाख रुपए तक और सेवा एवं व्यापार इकाइयों के लिए 10 लाख रुपए तक की परियोजना लागत अनुमन्य है।

योजना के अंतर्गत परियोजना लागत का 15 से 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी उपादान (सब्सिडी) के रूप में प्रदान किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत लगभग 32 हजार लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, इस योजना से अब तक 35 हजार से अधिक लाभार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के तहत अब तक 1,389 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण वितरण किया गया है, जिससे लगभग 64,966 नए रोजगार सृजित हुए हैं। यह प्रमाण है कि योजना केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर सशक्त रूप से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने इसे छोटे व्यापारियों और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रदेश के लिए एक 'गेम चेंजर योजना' बताया। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता को देखते हुए वर्ष 2025 से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 (एमएसवाई 2.0) प्रारंभ की गई है, जिसमें एमएसवाई और नैनो योजना का एकीकरण किया गया है। नई व्यवस्था में सब्सिडी की सीमा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक कर दी गई है। साथ ही भौगोलिक, सामाजिक और उत्पाद बूस्टर की अवधारणा के अंतर्गत अतिरिक्त 5 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जिससे योजना आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी सशक्त बनेगी।

उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को सब्सिडी ऑनलाइन माध्यम से सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है।

यह सरकार की पारदर्शिता, टेक्नोलॉजी-आधारित और भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यप्रणाली का प्रमाण है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है। हमारा लक्ष्य है कि हर जिले में स्थानीय उद्यम, हर गांव में रोजगार और हर युवा के हाथ में काम हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करते हुए डबल इंजन सरकार उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

सीएम धामी ने इस दौरान मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लाभार्थियों से संवाद भी किया। लोहाघाट, चंपावत के कमल सिंह पार्थोली ने कहा कि उन्होंने स्मार्ट लाइब्रेरी के लिए इस योजना के तहत 10 लाख रुपए का लोन लिया है। अभी यहां 130 बच्चे पढ़ रहे हैं, वे अब ई-लाइब्रेरी भी बनाएंगे।

उधम सिंह नगर के प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने गाड़ी सर्विस के कार्य के लिए 10 लाख रुपए का लोन लिया, वे पहले साइकिल रिपेयरिंग का कार्य करते थे।

उत्तरकाशी के जसपाल ने बताया कि उन्होंने फिटनेस क्लब की स्थापना के लिए 10 लाख रुपए का लोन लिया, अब वे इसका और विस्तार कर रहे हैं।

पौड़ी गढ़वाल के अयान मंसूरी ने बताया कि उन्होंने रजाई और गद्दा निर्माण के कार्य के लिए 10 लाख रुपए का लोन लिया, उनके साथ इस रोजगार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई लोग जुड़े हैं। इस साल उनका कारोबार तीन करोड़ रुपए होने का अनुमान है। बागेश्वर की चंपा देवी ने कहा कि उन्होंने मोबाइल सेल एंड सर्विस के लिए सात लाख रुपए का लोन लिया था। इस कार्य से उनकी आजीविका बढ़ी है।

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