सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी पर झुके संजय राउत, 'एक बार नहीं 10 बार माफी मांगता हूं...'
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट को लगता है कि याचिकाकर्ता के तौर पर उन्होंने कोई अनुचित बयान दिया है तो माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है। SIR में 12-13 करोड़ नाम कटने और पार्टी-चिन्ह मामले में सुनवाई के दौरान उनकी टिप्पणी पर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। राउत बोले, एक बार नहीं दस बार माफी मांगता हूं, कोर्ट का अवमान मेरा मकसद नहीं था।

शिवसेना (यूबीटी) नेता और सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि एक याचिकाकर्ता के तौर पर उन्होंने कोई अनुचित बयान दिया है, तो भारतीय संविधान की रक्षा करने वाले सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने में उन्हें कोई बुराई नहीं लगती। दरअसल पूरा मामला वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR से जुड़ा हुआ है। विपक्षी INDIA गठबंधन ने आरोप लगाया है कि SIR के नाम पर देश भर में 12 से 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान संजय राउत ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।
खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्यवाही के लिए अटॉर्नी जनरल से मंजूरी भी मांगी थी। इसी पृष्ठभूमि में राउत ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अपना रुख साफ किया। राउत ने कहा, "मैंने अपने जीवन में कभी भी कोर्ट का अपमान नहीं किया। आसपास जो कुछ हो रहा है उसे देखकर मन अस्वस्थ होता है, गुस्सा आता है। यह गुस्सा सिर्फ मेरा नहीं, देश के लाखों लोगों का है। उसी गुस्से में अगर मुंह से कोई शब्द इधर-उधर निकल गया हो तो मैं माफी मांगता हूं। एक बार नहीं, मैं दहा बार, दस बार सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगता हूं।" उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। जब न्याय के सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं तो आम आदमी आखिर में सुप्रीम कोर्ट के सामने ही खड़ा होता है।
चुनाव आयोग, राजभवन या सरकार से जब राहत नहीं मिलती तो सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी उम्मीद होता है। राउत ने अपनी भावना बताते हुए कहा कि उन्हें और देश को न्याय चाहिए। SIR के नाम पर जिन लोगों के नाम काटे गए हैं उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चार साल से उनकी पार्टी न्याय का इंतजार कर रही है, जब से पार्टी तोड़ी गई और चुनाव चिन्ह एक ऐसे व्यक्ति को दे दिया गया जिसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। राउत ने अंत में कहा कि अगर कोर्ट को लगता है कि उन्होंने कोई अवमाननापूर्ण बात कही है तो सरन्यायाधीश को स्पष्टीकरण मांगने और कंटेम्प्ट करने का पूरा अधिकार है। इस पर उन्हें कोई खेद नहीं है। लेकिन लोकतंत्र बचाने की जिम्मेदारी भी सुप्रीम कोर्ट की ही है। वे आखिरी सांस तक न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहेंगे।




