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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:26 · नई दिल्ली संस्करण

यमुनानगर:ऑपरेशन करके महिला के शरीर में छोड़ी थी पट्‌टी, आठ माह बाद डॉक्टरों पर एफआईआर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
यमुनानगर:ऑपरेशन करके महिला के शरीर में छोड़ी थी पट्‌टी, आठ माह बाद डॉक्टरों पर एफआईआर

जांच रिपोर्ट बदलने का भी किया था प्रयासयमुनानगर। यमुनानगर जिले में सामने आए मेडिकल लापरवाही के मामले में आठ महीने बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सिजेरियन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज (पट्टी) छोड़े जाने और बाद में फर्जी अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन रिपोर्ट बनाकर सच्चाई छिपाने के आरोप में पांच डॉक्टरों के खिलाफ मंगलवार की रात एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में मुख्य आरोपी एसपी अस्पताल जगाधरी की महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल हैं। उनके अलावा डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुप गोयल, डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉ. प्रदीप तेहलान, डॉ. निखिल मेहता और मॉडल टाउन स्थित अस्पताल के डॉ. कुलदीप चड्ढा को भी आरोपी बनाया गया है।पीड़िता मेहर खातून (21) के पति के अनुसार, 13 मार्च 2025 को उनकी पत्नी का सिजेरियन किया गया था, जिसमें एक स्वस्थ शिशु का जन्म हुआ। कुछ दिनों बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। लगातार दर्द, सूजन और कमजोरी के बावजूद बार-बार कराई गई जांचों में उसे सामान्य बताया गया। आरोप है कि जानबूझकर झूठी रिपोर्ट देकर वास्तविक कारण छिपाया गया और महिला को गलत इलाज की ओर धकेला गया। महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। अंततः पंचकूला के एक निजी अस्पताल में कराई गई उन्नत जांच में सामने आया कि उसके गर्भ में लंबे समय से सर्जिकल स्पंज फंसा हुआ है, जिससे गंभीर संक्रमण फैल चुका था।24 मई 2025 को आपात ऑपरेशन कर पट्टी निकाली गई, इस दौरान आंतों का हिस्सा भी काटना पड़ा। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि थोड़ी और देरी जानलेवा हो सकती थी। पीड़िता के परिवार का कहना है कि इलाज और ऑपरेशनों में करीब एक लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं और वे मानसिक, शारीरिक व आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।मामला डीसी द्वारा गठित जांच समिति और बाद में ग्रीवेंस कमेटी की बैठकों में उठा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने जांच में लापरवाही की पुष्टि होने पर एसपी को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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