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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:17 · नई दिल्ली संस्करण

आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई के लिए डीजीपी को लिखा पत्र

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

देहरादून,। एसजीआरआर मेडिकल काॅलेज में छात्र द्वारा आत्महत्या के

मामले को राजनीतिक रंग देने वालों के खिलाफ मेडिकल काॅलेज कानूनी कार्रवाई

करेगा। सोशल मीडिया, ट्विटर व इंस्टाग्राम पर भ्रामक जानकारियों को पोस्ट

करने वालों के खिलाफ मेडिकल काॅलेज प्रबंधन ने पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड

को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। एसजीआरआर मेडिकल काॅलेज के वरिष्ठ

विधि विशेषज्ञों ने मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों एवं वीडियो फुटेज को देखने

के बाद मेडिकल काॅलेज की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

शुरू कर दी है।

श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ

साइंसेज ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर पूरे घटनाक्रम सेे अवगत कराया

है। पत्र के माध्यम से बताया है कि शिशु रोग विभाग के संज्ञान में प्रारम्भ

में यह जानकारी आई थी कि छात्र देवेश गर्ग पीजी छोड़ना चाहते हैं। उनका

प्रवेश अंतिम काउंसलिंग में हुआ था और वह पीजी की पढ़ाई में सामन्जस्य

स्थापित नहीं कर पा रहे थे। उस समय उनकी यूनिट भी बदली गई। उनके पिता

काॅलेज में आए थे। उनके पिता को समझाकर विभागीय काउंसलिंग की गई कि देवेश

पीजी का कोर्स पूरा करें। काफी हद तक समझाने और काउंसलिंग के बाद उन्होंने

पढ़ाई शुरू कर दी थी। छात्र अथवा अभिभावक ने कभी भी किसी प्रकार की कोई

मौखिक या लिखित शिकायत काॅलेज में नहीं दी। कोई संदेह नहीं है कि मेडिकल की

पढ़ाई कठिन होती है। मेडिकल एजुकेशन की रेग्यूलेटी बाॅडी नेशनल मेडिकल

कमीशन के नियमों का काॅलेज और छात्र को सख्ती से पालन करना पढ़़ता है।

मेडिकल

काॅलेज ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राचार्य उत्कर्ष शर्मा ने यह कभी दावा

नहीं किया कि छात्र ने पारिवारिक कारणों से यह आत्मघाती कदम उठाया। छात्र

द्वारा उठाया गया यह कदम जांच का विषय है। छात्र ने आत्महत्या की है, लेकिन

कारणों के बारे में मेडिकल काॅलेज जानकारी नहीं दे सकता है। अफसोस की बात

है कि कुछ छात्र बिना मेहनत किए काॅलेज प्रशासन पर दबाव बनाकर अपनी डिग्री

हासिल करना चाहते हैं। ऐसे असामाजिक तत्वों से समाज को सावधान रहने की

आवश्यता है। छात्रों एवं फेकल्टी एमएनसी के नियमों से बंधे हुए हैं।

सोशल

मीडिया पर यह भी चल रहा है कि थीसिस फाड़ी गई थी, जो सच नहीं है। यदि किसी

के व्यक्ति के पास इस बात का काई प्रमाण हो तो वह सार्वजनिक करे। थीसिस

तैयार करने और जमा करने का समय तृृतीय वर्ष में होता है। जबकि छात्र अभी

प्रथम वर्ष में था। आरोप लगाया कि कुछ छात्रों ने एक युवा डाॅक्टर की

आत्महत्या के विषय का इस्तेमाल निज स्वार्थों को पूरा करने केे लिए किया

है। इसकी जांच की जा रही है। संस्थान ऐसे छात्रों के खिलाफ निष्पक्ष जांच

की पैरवी करता है।

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