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सोमवार, 2 नवंबर 2026 · शाम 4:09 · नई दिल्ली संस्करण

कलावा बांधने का सही तरीका क्या है? जानें पूरा नियम वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल

कलावा सिर्फ धागा नहीं, रक्षा सूत्र है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषों को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए, क्योंकि दायां हाथ सूर्य नाड़ी और कर्म का प्रतीक है। महिलाओं के लिए नियम अलग है - अविवाहित लड़कियां दाएं और विवाहित महिलाएं बाएं हाथ में बांधें, बायां हाथ चंद्र नाड़ी और सुख-शांति का कारक है। कलावा हमेशा 3 बार लपेट कर 3 गांठ के साथ बांधें और गंदा होने पर पीपल के नीचे रख दें।

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कलावा बांधने का सही तरीका क्या है? जानें पूरा नियम वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल

सनातन धर्म में कलावा या मौली को सिर्फ धागा नहीं, बल्कि रक्षा सूत्र माना जाता है। पूजा-पाठ, हवन या किसी भी शुभ काम में कलाई पर कलावा बांधना अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि इसे बांधने से त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा मिलती है और बुरी नजर से बचाव होता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि कलावा किस हाथ में बांधना चाहिए? पुरुष और महिला के लिए इसका नियम अलग है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषों को हमेशा दाएं हाथ की कलाई पर कलावा बांधना चाहिए। दायां हाथ सूर्य नाड़ी का प्रतीक है, जो पुरुषों में कर्म और शक्ति का कारक है। दाएं हाथ पर कलावा बांधने से आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। जब भी कोई पुरुष किसी पूजा में शामिल होता है, तो पंडित जी सबसे पहले उसके दाएं हाथ में ही मौली बांधते हैं।



महिलाओं के लिए नियम थोड़ा अलग है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अविवाहित लड़कियों को दाएं हाथ में और विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए। बायां हाथ चंद्र नाड़ी का प्रतीक है, जो मन, शीतलता और परिवार की सुख-शांति से जुड़ा है। सुहागन महिलाओं के बाएं हाथ पर कलावा पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख की कामना के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि कई जगहों पर सभी महिलाओं को बाएं हाथ में कलावा बांधने की परंपरा भी है। कलावा हमेशा 3 या 5 बार लपेट कर बांधना चाहिए और गांठ में 3 गांठ लगाना शुभ माना जाता है। कलावा बंधवाते समय हाथ में अक्षत और मुट्ठी बंद रखनी चाहिए।



वैज्ञानिक दृष्टि से भी कलाई पर कलावा बांधने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और बीमारियों से बचाव होता है। कलावा पुराना और गंदा होने पर किसी भी मंगलवार या शनिवार को उतारकर पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए या बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए, कूड़ेदान में कभी न फेंकें। अशुद्ध हाथों से कलावा न बांधें और न ही शौचालय में इसे उतारें। कुल मिलाकर नियम साफ है, पुरुष दाएं हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में कलावा बांधें तो सबसे ज्यादा शुभ फल मिलता है और इसके साथ ही भगवान की कृपा भी बनी रहती है। 

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