प्रदर्शन करना है तो जंतर-मंतर नहीं, रामलीला मैदान जाओ - दिल्ली पुलिस का नया आदेश
दिल्ली पुलिस ने बड़ा फैसला लेते हुए जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से हटा दिया है। 11 अक्टूबर को जारी आदेश के बाद अब वहां कोई धरना-प्रदर्शन नहीं होगा। इसकी जगह 3 नई जगहें तय की गई हैं - रामलीला मैदान (3 किमी दूर), CBD ग्राउंड शाहदरा (11 किमी दूर) और बुराड़ी मैदान (20 किमी दूर)। भीड़ की क्षमता के हिसाब से जगह तय होगी। ट्रैफिक और सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया है।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आंदोलन की सबसे पहचान रही जगह जंतर-मंतर अब प्रोटेस्ट साइट नहीं रही। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है, यानी डिनोटिफाई कर दिया है। अब यहां किसी भी तरह का धरना, प्रदर्शन, नारेबाजी या अनशन नहीं हो सकेगा। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को इस संबंध में स्थायी आदेश जारी किया है। यह आदेश गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है। कमेटी को कहा गया था कि नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार के लिए जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर दूसरी उचित जगहों की तलाश करे।
जंतर-मंतर की जगह अब दिल्ली में 3 नई जगहों को प्रोटेस्ट के लिए नोटिफाई किया गया है: रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली में स्थित। जंतर-मंतर से इसकी दूरी करीब 3 से 3.2 किलोमीटर है। यहां 1000 से 50,000 लोगों तक की भीड़ वाले प्रदर्शन हो सकेंगे। बुराड़ी मैदान (निरंकारी ग्राउंड): उत्तर-पूर्वी दिल्ली में। जंतर-मंतर से इसकी दूरी लगभग 20 किलोमीटर है। यहां 50,000 से ज्यादा लोगों वाले बड़े आंदोलनों की इजाजत होगी। 2020-21 का किसान आंदोलन यहीं हुआ था। CBD ग्राउंड, शाहदरा: पूर्वी दिल्ली में। जंतर-मंतर से करीब 11-12 किलोमीटर दूर। छोटे-बड़े दोनों तरह के प्रदर्शनों के लिए इस्तेमाल होगा। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इन तीनों जगहों पर भी बिना इजाजत प्रदर्शन नहीं होगा। इसके लिए पहले पुलिस से परमिशन लेनी होगी।
जल्द ही इसके लिए नई SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी की जाएगी। यह नया आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने आदेश L&O/48/22 में संशोधन है। पुलिस ने फैसले के पीछे 2 बड़ी वजह बताई हैं। पहला- ट्रैफिक और व्यापार। जंतर-मंतर संसद मार्ग पर है, जो लुटियंस दिल्ली का अति-संवेदनशील इलाका है। यहां रोज प्रदर्शन होने से ट्रैफिक डायवर्जन करना पड़ता है, जिससे पूरी सेंट्रल दिल्ली जाम हो जाती है। स्थानीय व्यापारियों ने भी लगातार शिकायत की थी कि प्रदर्शनों से उनका बिजनेस प्रभावित होता है। दूसरा- सुरक्षा। जंतर-मंतर के आसपास कई मंत्रालय, VVIP मूवमेंट होता है। भीड़ जुटने से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनती थी।
बीते दिनों जंतर-मंतर पर 1000 की तय क्षमता के बावजूद हजारों लोग जुटे, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। 1993 में बोट क्लब से हटाकर जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रोटेस्ट साइट बनाया गया था। यहां निर्भया आंदोलन 2012, वन रैंक-वन पेंशन 2015, अन्ना हजारे का जनलोकपाल आंदोलन 2011 और CAA विरोधी प्रदर्शन जैसे ऐतिहासिक आंदोलन हुए हैं। वहीं इस फैसले पर सियासत भी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, 'उन्होंने जंतर-मंतर को युद्ध का मैदान बना दिया था। अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।' फिलहाल पुलिस ने जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि कोई अनधिकृत जमावड़ा न हो सके।




