जंतर-मंतर बैन पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान, बोले- हर गली को बनाएंगे प्रोटेस्ट साइट
'अब पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर', जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से हटाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, "उन्होंने जंतर-मंतर को युद्ध का मैदान बना दिया था। अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।" दिपके ने कहा कि 20 KM दूर बुराड़ी में प्रदर्शन से सरकार पर कोई दबाव नहीं बनेगा। उन्होंने इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती देने और 15 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है।

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस द्वारा ऐतिहासिक जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई करने के फैसले पर अब सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है, "उन्होंने जंतर-मंतर को युद्ध का मैदान बना दिया था, अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।" शनिवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार द्वारा जारी स्थायी आदेश में जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। इसके बदले रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और शाहदरा के CBD ग्राउंड को नए प्रोटेस्ट स्थल के तौर पर अधिसूचित किया गया है।
प्रशासन का तर्क है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों से सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफिक जाम और स्थानीय व्यापारियों को नुकसान होता था। इस फैसले पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि इस देश में विरोध की आवाज का प्रतीक है। दिपके ने बयान जारी करते हुए कहा, "1993 से जंतर-मंतर आम आदमी की संसद रही है। निर्भया से लेकर अन्ना आंदोलन तक, हर बड़ी आवाज यहीं से निकली है। सरकार को लगता है कि जगह बदल देने से आवाज दब जाएगी, तो यह उनकी गलतफहमी है।" उन्होंने आगे कहा, "पिछले कुछ दिनों से जंतर-मंतर पर जिस तरह बैरिकेडिंग की गई, पुलिस तैनात की गई, ऐसा लग रहा था जैसे युद्ध का मैदान बना दिया हो। आपने एक जंतर-मंतर बंद किया है, अब हम पूरे देश को जंतर-मंतर बना देंगे। हर गली, हर मोहल्ला, हर चौक अब प्रोटेस्ट साइट होगा।"
अभिजीत दिपके ने कहा कि बुराड़ी मैदान 20 किलोमीटर दूर है, जो शहर के बाहरी इलाके में है। वहां प्रदर्शन करने से सरकार पर कोई दबाव नहीं बनेगा। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में प्रदर्शन इसलिए किया जाता है ताकि सरकार तक आवाज पहुंचे। आप आवाज को ही 20 KM दूर जंगल में भेज दोगे तो सरकार सुनेगी कैसे? यही तो मकसद है कि कोई सुने ही नहीं।" उन्होंने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान की बुकिंग पहले से ही बेहद मुश्किल है और वहां परमिशन के लिए महीनों लगते हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए आंदोलन करना लगभग असंभव हो जाएगा।
CJP सूत्रों के मुताबिक अभिजीत दिपके ने इस आदेश के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने का ऐलान किया है। उनकी पार्टी हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दे सकती है। साथ ही उन्होंने 15 अक्टूबर को 'देशव्यापी जंतर-मंतर दिवस' मनाने का आह्वान किया है, जिसमें देश के अलग-अलग जिलों में एक साथ प्रदर्शन किया जाएगा। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को हटाने का यह आदेश बिना किसी समाप्ति तिथि के जारी किया गया है, यानी यह स्थायी रूप से लागू रहेगा। इससे पहले 1993 तक बोट क्लब पर प्रदर्शन होते थे, जिसे हटाकर जंतर-मंतर को आधिकारिक स्थल बनाया गया था। अब 33 साल बाद एक बार फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा है।
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