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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 · शाम 6:53 · नई दिल्ली संस्करण

लंच तक जॉब थी, लंच के बाद गई! Innodata ने 550 कर्मचारियों को एक झटके में निकाला, जानें अंदर की कहानी

AI कंपनी Innodata ने 26 अक्टूबर को भारत में 550 से ज्यादा कर्मचारियों को रातों-रात निकाल दिया। आरोप है कि लंच के बाद एक-एक कर लैपटॉप लॉगआउट होने लगे और ID डीएक्टिवेट हो गईं। कर्मचारियों को बिना HR मीटिंग के पर्सनल मेल पर टर्मिनेशन लेटर मिला, जिसमें "बिजनेस रैंप-डाउन" वजह बताई गई। इससे कंपनी का शेयर Nasdaq पर 25% टूट गया। फिलीपींस में भी छंटनी हुई है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
लंच तक जॉब थी, लंच के बाद गई! Innodata ने 550 कर्मचारियों को एक झटके में निकाला, जानें अंदर की कहानी

अमेरिका की AI सर्विस कंपनी Innodata ने भारत में रातों-रात बड़ी छंटनी कर दी है। 26 अक्टूबर को शुरू हुआ एक आम सोमवार देखते ही देखते 550 से ज्यादा कर्मचारियों के लिए काला दिन बन गया। कंपनी पर आरोप है कि उसने बिना किसी नोटिस के 90% इंडिया टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया। निकाले गए कर्मचारियों ने बताया कि दिन की शुरुआत बिल्कुल नॉर्मल थी। सभी ने लॉग-इन किया, अटेंडेंस लगाई और काम शुरू किया। लंच तक सब ठीक था। तभी फिलीपींस की टीम से खबर आई कि वहां Zoom कॉल पर रेटर्स, क्वालिटी एक्सपर्ट्स, टीम लीड्स को फायर कर दिया गया है।



कुछ देर बाद भारत में भी वही होने लगा। दिल्ली के एक कर्मचारी ने India Today को बताया - "एक-एक करके हमारा ऑफिशियल लैपटॉप लॉगआउट होने लगा, ऑफिशियल ID डीएक्टिवेट हो गईं।" कर्मचारियों ने HR पोर्टल चेक किया तो वहां उनकी पेस्लिप पहले से जेनरेट हो चुकी थी, जिसमें 26 अक्टूबर को ही Resignation Date और Last Working Day लिखा था। शाम तक उन्हें पर्सनल ईमेल पर टर्मिनेशन लेटर आ गया। HR से कोई कॉल नहीं, कोई मीटिंग नहीं। कई लोगों का तो HR पेरोल ऐप तक का एक्सेस बंद कर दिया गया, इसलिए वे अपनी सैलरी स्लिप और जरूरी डॉक्यूमेंट भी डाउनलोड नहीं कर पाए।



घटना के कुछ घंटों के भीतर ही निकाले गए कर्मचारियों ने WhatsApp पर "The Lay off victims" नाम से ग्रुप बनाया, जिसमें 617 मेंबर जुड़ गए। ग्रुप में 500 से ज्यादा लोग पूरी तरह से सदमे में थे और जवाब मांग रहे थे। टर्मिनेशन ईमेल में वजह लिखी थी - "ramp-down of the business assignment" यानी बिजनेस असाइनमेंट में कमी। कंपनी ने साफ लिखा कि यह फैसला किसी के परफॉर्मेंस के आधार पर नहीं, बल्कि बिजनेस और ऑपरेशनल जरूरतों के चलते लिया गया है। लेकिन असली वजह क्या है? रिपोर्ट्स के मुताबिक Innodata की दो सबसे बड़ी क्लाइंट ही उसकी कुल कमाई का 71% हिस्सा हैं। माना जा रहा है कि किसी बड़े क्लाइंट ने अपना प्रोजेक्ट घटा दिया या वापस ले लिया, जिसकी वजह से इतनी बड़ी छंटनी करनी पड़ी। 



कंपनी ने अभी तक न क्लाइंट का नाम बताया है, न ही कितना रेवेन्यू इफेक्ट हुआ है। कंपनी की 2025 की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक उसके पास ग्लोबल लेवल पर 10,107 कर्मचारी थे। ऐसे में भारत में 550 लोगों को निकालना उसके ग्लोबल वर्कफोर्स का 5% से ज्यादा है। एक कर्मचारी ने दावा किया कि भारत में उसकी जान-पहचान के सिर्फ 5 लोग ही बचे हैं, बाकी 90% को निकाल दिया गया। इस खबर का असर सीधे शेयर मार्केट पर पड़ा। Nasdaq पर Innodata का शेयर (INOD) 27 अक्टूबर को 25.32% टूट गया और $59.91 से गिरकर $44.74 पर बंद हुआ। प्री-मार्केट में तो 28% तक की गिरावट देखी गई। 



अब निवेशकों की तरफ से कंपनी के खिलाफ जांच की बात भी सामने आ रही है कि क्या कंपनी ने निवेशकों से बिजनेस रिस्क छिपाया था। उधर, निकाले गए कर्मचारी अब लीगल एक्शन की तैयारी कर रहे हैं। कंपनी ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, उसका तीसरी तिमाही का रिजल्ट 5 नवंबर को आना है, तभी कुछ साफ होगा।

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